नई दिल्ली। हिंदू धर्म में किसी व्यक्ति के निधन के बाद अंतिम संस्कार या शोक सभा में सफेद कपड़े पहनने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। अक्सर अंतिम यात्रा में लोग सफेद वेशभूषा में ही दिखाई देते हैं। यह सिर्फ एक रिवाज़ नहीं, बल्कि इसके पीछे गहरी धार्मिक मान्यताएँ और आध्यात्मिक कारण जुड़े हुए हैं।
1. शांति, पवित्रता और सादगी का प्रतीक
सनातन धर्म में सफेद रंग को विशेष महत्व दिया गया है और इसे निम्नलिखित आध्यात्मिक गुणों का प्रतीक माना जाता है:
शांति और पवित्रता: सफेद रंग को शांति, पवित्रता और सादगी का प्रतीक माना जाता है। अंतिम संस्कार दुख और भावनात्मक पीड़ा का समय होता है, ऐसे में सफेद रंग मानसिक शांति बनाए रखने में मदद करता है।
संतुलन: यह रंग मन और आत्मा को संतुलित करता है, और दुखी परिवार को धैर्य और हिम्मत देने का संदेश देता है।
आध्यात्मिक गुण: सफेद रंग सत्य, ज्ञान और सद्भाव का प्रतिनिधित्व करता है, जो हिंदू धर्म के मूल गुण माने गए हैं।
2. आत्मा की मोक्ष यात्रा में सहायक
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सफेद वस्त्र पहनने से मृतक की आत्मा की मोक्ष की यात्रा सरल हो जाती है:
शांत वातावरण: मृत्यु के बाद आत्मा शरीर छोड़कर अपनी नई यात्रा पर निकलती है। कहा जाता है कि अंतिम संस्कार में सफेद कपड़े पहनने से आसपास का वातावरण शांत और पवित्र बना रहता है, जिससे आत्मा को शांति मिलती है।
शोक और सम्मान: सफेद रंग शोक और वात्सल्य दोनों का प्रतीक है। यह रंग मृतक के प्रति गहरा सम्मान और उन्हें शांत विदाई देने का भाव रखता है।
काला रंग या अन्य गहरे रंग अक्सर दुख और नकारात्मक ऊर्जा से जुड़े होते हैं, जबकि सफेद रंग को शुद्ध और प्रकाशमान माना जाता है, जो आत्मा की शांति के लिए सबसे उपयुक्त होता है।
