हालांकिश्रेय ग्रुप ने इस धोखाधड़ी के आरोपों को चुनौती दी हैयह कहते हुए कि मामला अभी अदालत में विचाराधीन है। श्रेय ग्रुप ने फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट को संदिग्ध बताया और अदालत से इसकी निष्पक्ष जांच की अपील की है।इसके पहलेपंजाब एंड सिंध बैंकबैंक ऑफ बड़ौदा और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया जैसे अन्य बैंकों ने भी श्रेय फर्मों के लोन खातों को धोखाधड़ी घोषित किया था।श्रेय ग्रुप 2021 से दिवालियापन समाधान प्रक्रिया से गुजर रहा है। 2023 में राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण एनसीएलटीने राष्ट्रीय परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनी एनआरसीएलद्वारा प्रस्तुत समाधान योजना को मंजूरी दी थी।
भारतीय रिजर्व बैंक ने अक्टूबर 2021 में श्रेय ग्रुप को एनसीएलटी के समक्ष भेजा थाक्योंकि बैंकिंग प्रणाली में उसके द्वारा की गई चूकों और शासन संबंधी समस्याओं का पता चला था। साथ हीरिजर्व बैंक ने श्रेय इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस और श्रेय इक्विपमेंट फाइनेंस के बोर्डों को भंग कर दिया था।फरवरी 2023 में एनआरसीएल ने बोली जीतीऔर अगस्त 2023 में एनसीएलटी से इसे मंजूरी मिली। इसके बाद जनवरी 2024 तक अधिग्रहण को अंतिम रूप दिए जाने की योजना है।इस मामले में बैंक और संबंधित संस्थाएं यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही हैं किधोखाधड़ी का समाधान किया जाए और श्रेय ग्रुप के दिवालियापन समाधान के बाद संबंधित लोन खातों का सही तरीके से निपटारा किया जाए।
