नर्मदाजल को देते उतरनों की वसीयत माँ नर्मदा तू पतितपावनी है, तेरा शीतल जल देता है पाप...
कहानी
हे मातु नर्मदे हम है तेरे तट के वासी करूणा कर दे ऐसी, बने सभी सुखरासी।...
पाकर सब, कुछ ना मिले, होकर जिम्मेवार। कितना धोखेबाज़ है, ‘सौरभ’ ये किरदार।। जिनको अपना मानकर, सौंपा...
छपकर बिकते थे कभी, सच के थे अख़बार, अब तो बिककर छप रहे, कलम है शर्मसार॥ सच...
फ्रेंड लिस्ट में हैं जुड़े, सबके दोस्त हज़ार, मगर पड़ोसी से नहीं, पहले जैसा प्यार॥ मोबाइल की...
भया अहमदाबाद में,मोदी के मैदान। टी ट्वेंटी का फाईनल, जीता हिन्दुस्तान।। टी ट्वेंटी की सुनो कहानी। भारत...
“”पानी रे पानी……. हम बूंद-बूंद कूं तरसैगे।”” दूधिया भौर भये पैज्यों, लेउ दूध की टेर लगावत...
“जड़ें ना खोदें अपनी!” जैसे -जैसे प्रगति की ओर है अग्रसर मानव अपनी इतिहासिक धरोहरों को भूल...
एक स्त्री, कई सुबहें – कल्पना मनोरमा कल्पना मनोरमा समकालीन कहानी एवम् कविता की दुनिया का एक...
