देश के ज्वलंत मुद्दे को लेकर- शहरनामा “जंतर-मंतर की हुंकार और सत्ता की लाचारी” आख़िरकार शिक्षा के...
विचार
युवाओं को संगठित करने की श्रेयता तो, जस्टिस सूर्यकांत जी के पाले में ही आयेंगी….? एक शब्द,...
शहरनामा दिल्ली में छात्र प्रर्दशन से उठे सवाल.. “आख़िर छात्र जाएँ तो जाएँ कहाँ?” जब किसी राष्ट्र...
हमारे बुज़ुर्ग एक छोटी-सी बात कह जाते थे—”जितनी चादर हो, उतने ही पैर पसारो।” उस समय यह...
सियासत का भी बड़ा अजब मिज़ाज है। चुनाव आते ही युवा देश का भविष्य कहलाने लगता है,...
चेदीदास (संजीव डे राय ) शायद अंग्रेजों ने भी भारतीय आन्दोलन कुचलने के लिए इतनी बर्बरता...
डॉ. मयंक चतुर्वेदी भारतीय अकादमिक जगत में कुछ नाम ऐसे हैं जो अपने शोध, लेखन और शिक्षण...
– डॉ. प्रियंका सौरभ भारतीय लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करने के तरीके समय के साथ बदलते रहे...
डॉ मयंक चतुर्वेदी दिल्ली की सड़कों पर फिर वही चीख गूंजी है, जिसे इस देश ने 2012...
भारतीय सरकारी व्यवस्था के संचालन मे विभागीय प्रशासनिक अधिकारियों और मंत्रियों / चुने हुए जनप्रतिनिधियों...
