तरुण कुमार ने लिखा कि जब उन्हें एक्सीडेंट की खबर मिली, तो वे और उनकी बेटी जया कुछ समय पहले लंदन गए हुए थे। लखनऊ लौटने के बाद उन्होंने तुरंत मुंबई के लिए रवाना होना तय किया। पूरे देश में लोग अमिताभ की सुरक्षित वापसी और ठीक होने के लिए प्रार्थना कर रहे थे। तरुण कुमार ने अपने लेख में इसे चिकित्सीय चमत्कार बताया और कहा कि अगर अमिताभ नहीं बचते, तो सभी डॉक्टरों को दोषी ठहराया जाता।उन्होंने लिखा, “हम लखनऊ से मुंबई के लिए रवाना हुए। पूरा देश एक आदमी के ठीक होने के लिए दुआ कर रहा था। जब अमिताभ बच गए, तो मेरी पत्नी और लाखों लोगों ने इसे ईश्वर की कृपा बताया। मैं इससे सहमत नहीं हूं। मेरे लिए यह ब्रीच कैंडी अस्पताल की चिकित्सा टीम का चमत्कार था।”
इस कठिन समय में जया बच्चन ने भी पूरी मजबूती दिखाई। तरुण कुमार ने अपने लेख में विस्तार से बताया कि अस्पताल में भर्ती अमिताभ के दौरान जया ने संयम और धैर्य बनाए रखा। उन्होंने मनके और ताबीज पहनकर और दिल से प्रार्थना करते हुए अमिताभ के जल्दी ठीक होने की कामना की। बाहरी तौर पर जया शांत और संयमित दिखीं, लेकिन अंदर से उन्होंने स्थिति को स्वीकार किया और सबसे बुरे हालात के लिए भी तैयार रहीं।तरुण कुमार ने लिखा कि जया बच्चन ने इस समय में अपनी हिम्मत और धैर्य से परिवार के लिए मिसाल पेश की। उन्होंने अस्पताल में रहने वाले अमिताभ की देखभाल और मानसिक समर्थन में सक्रिय भूमिका निभाई।
इस घटना ने न केवल अमिताभ के परिवार को बल्कि पूरे देश को झकझोर दिया। मीडिया और फिल्म इंडस्ट्री लगातार उनके स्वास्थ्य की जानकारी साझा कर रही थी। अमिताभ के जल्द स्वस्थ होने और अस्पताल से बाहर निकलने के बाद देश में राहत की लहर दौड़ गई।कुली फिल्म सेट पर हुए इस एक्सीडेंट ने यह भी साबित किया कि संकट के समय परिवार और चिकित्सकीय टीम की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यह घटना बॉलीवुड इतिहास में यादगार और महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में दर्ज हुई है, जिसने परिवार और इंडस्ट्री दोनों के लिए धैर्य, साहस और सहनशीलता की मिसाल पेश की।
