भोपाल। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल के कारण हुई मौतों के 11 दिन बादमध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के शहरी क्षेत्रों में जलापूर्ति प्रणाली के लिए मानक संचालन प्रक्रिया एसओपी जारी की है। यह कदम पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करनेरिसाव रोकने और शिकायत निवारण तंत्र को सुदृढ़ करने के लिए उठाया गया है। मध्य प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने शुक्रवार देर रात इस एसओपी को जारी किया। इसके तहतशहरी क्षेत्रों में जल वितरण प्रणाली की नियमित जांच और अनुरक्षण की व्यवस्था की गई है।
एसओपी के प्रमुख बिंदु
सर्वेक्षण शहरी क्षेत्रों में जल वितरण प्रणाली का सात दिन में सर्वे किया जाएगा। पाइपलाइन का निरीक्षण 20 वर्ष से अधिक पुरानी पाइपलाइनों का चिन्हांकन करइन पाइपलाइनों से रिसाव को 48 घंटे के भीतर सुधारने की जिम्मेदारी तय की गई है। जल शोधन संयंत्र और टंकी की सफाई जल शोधन संयंत्रों और उच्च स्तरीय टंकियों की सफाई और निरीक्षण सात दिन के भीतर किया जाएगा।
शिकायत निवारण शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए सशक्त तंत्र स्थापित किया जाएगा। इस एसओपी को केंद्रीय लोक स्वास्थ्य एवं पर्यावरण अभियंत्रण संगठन द्वारा जारी मैन्युअल ऑन वाटर सप्लाई एंड ट्रीटमेंट और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के आधार पर तैयार किया गया है।
जलापूर्ति की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की कोशिश
एसओपी के मुताबिकशहरी स्थानीय निकायों के लिए इसे अनिवार्य किया गया हैताकि लोगों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल मिले। जलापूर्ति प्रणाली की गुणवत्ता की नियमित जांचपुराने पाइपलाइनों के बदलाव और शोधन संयंत्रों की सफाई इस प्रक्रिया का हिस्सा हैं। इस कदम को लेकर अधिकारियों का कहना है कि इससे पानी की गुणवत्ता में सुधार होगा और भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति को रोका जा सकेगा।
