नई दिल्ली । भारत के ‘सोलर मिशन’ आदित्य-एल1 ने 2026 के लिए सौर तूफानों की भविष्यवाणी और उनकी गतिविधियों को समझने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यह मिशन भारत की पहली सौर अंतरिक्ष वेधशाला के रूप में स्थापित किया गया है जो सूर्य के सबसे सक्रिय चरण सोलर मैक्सिमम में सूर्य की गतिविधियों पर नजर रखने का काम कर रहा है।
सौर चक्र एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसमें सूर्य अपनी चुंबकीय गतिविधियों के अंतराल में बदलाव करता है। यह प्रक्रिया लगभग हर 11 साल में अपने चरम पर होती है। नासा के अनुसार सूर्य अब सोलर मैक्सिमम के चरण में प्रवेश कर चुका है जहां सौर धब्बों की संख्या बढ़ जाती है और सौर गतिविधि तेज होती है। इस चरण के दौरान सूर्य के विशाल विस्फोट जिन्हें प्रभामंडलीय द्रव्यमान उत्सर्जन CME कहा जाता है पृथ्वी और पूरे सौर मंडल पर प्रभाव डालते हैं।
आदित्य-एल1 और गैनन तूफान
2024 में आदित्य-एल1 ने एक शक्तिशाली सौर तूफान का अध्ययन किया जिसे ‘गैनन तूफान’ कहा गया। इस तूफान ने पृथ्वी के पर्यावरण को गंभीर रूप से प्रभावित किया। सौर तूफान सूर्य पर होने वाले विस्फोटों की एक शृंखला के कारण उत्पन्न होते हैं जो पृथ्वी के चुंबकीय कवच को हिला सकते हैं और उपग्रहों संचार प्रणालियों जीपीएस और विद्युत ग्रिड जैसी प्रणालियों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
चुंबकीय पुनर्संयोजन की खोज
गैनन तूफान के दौरान वैज्ञानिकों ने एक असामान्य घटना का अवलोकन किया। सूर्य के चुंबकीय क्षेत्र जो सौर तूफान के अंदर मुड़ी हुई रस्सियों की तरह होते हैं अचानक टूटकर फिर से जुड़ गए। इस प्रक्रिया को चुंबकीय पुनर्संयोजन कहा जाता है। यह घटना सौर तूफान के प्रभाव को पहले से कहीं ज्यादा शक्तिशाली बना देती है। आदित्य-एल1 के द्वारा प्राप्त चुंबकीय क्षेत्र के सटीक माप से वैज्ञानिकों ने इस क्षेत्र का मानचित्रण किया और पाया कि सीएमई के अंदर चुंबकीय क्षेत्र का टूटना और पुनर्संयोजन बेहद बड़ा था लगभग 1.3 मिलियन किलोमीटर चौड़ा जो पृथ्वी के आकार से 100 गुना बड़ा था ।
भारत की सौर विज्ञान में बढ़ती भूमिका
भारत की सौर विज्ञान में बढ़ती भूमिका
यह खोज इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे सूर्य से पृथ्वी की ओर आने वाले सौर तूफानों के विकास को समझने में मदद मिलती है। आदित्य-एल1 मिशन के द्वारा किया गया यह अध्ययन वैश्विक अंतरिक्ष विज्ञान में भारत के बढ़ते नेतृत्व को दर्शाता है। अब भारत सौर तूफानों और उनके प्रभाव को बेहतर तरीके से समझने में सक्षम होगा जिससे भविष्य में सौर तूफानों की भविष्यवाणी करने में मदद मिल सकती है।भारत का यह सौर मिशन अंतरिक्ष विज्ञान में एक नई दिशा दे सकता है और वैश्विक स्तर पर सौर तूफानों के अध्ययन और उनके प्रभावों के बारे में हमारी समझ को बेहतर बना सकता है। 2026 में आदित्य-एल1 से विज्ञान के क्षेत्र में नई संभावनाएं देखने को मिल सकती हैं।
