मरीज सतीष सेन ने बताया कि वे शुक्रवार शाम करीब पांच बजे पैर में फ्रैक्चर की आशंका के चलते जेपी अस्पताल की आर्थोपेडिक ओपीडी में पहुंचे थे। ओपीडी में उस वक्त कोई सीनियर डॉक्टर मौजूद नहीं थे और इंटर्न डॉक्टरों ने उनका परीक्षण किया। इसके बाद मरीज को एक्स-रे की सिफारिश की गई और दर्द की दवा लिखी गई जो बाद में फफूंद लगी हुई मिली।
इस घटना ने अस्पताल में चिकित्सा गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मरीज को अगर दवा की स्थिति का पता न चलता तो इसे स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा माना जा सकता था। इसके अलावा सीनियर डॉक्टरों की अनुपस्थिति ने भी ओपीडी में इलाज के स्तर को प्रभावित किया।
इस मामले को लेकर स्थानीय नागरिकों और स्वास्थ्य संगठनों नेप्रशासन से कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही से बचा जासके और मरीजों को बेहतर इलाज और दवाइयां मिल सकें। अस्पताल प्रशासन को इस गंभीर मुद्दे पर तुरंत कदम उठाने चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि मरीजों को गुणवत्ता वाली दवाइयां और इलाज मिले।
