वेनेजुएला पर हुए अमेरिका आक्रमण की निंदा करते हुए किम जोंग उन के प्रशासन ने इसे अंतर्राष्ट्रीय कानूनों और एक संप्रुभ देश की स्वतंत्रता पर सीधा हमला करार दिया। प्योंगयांग ने कहा कि यह कदम साम्राज्यवादी अमेरिका के बागी और क्रूर स्वाभाव को दर्शाता है।
प्योंगयांग की तरफ से की गई यह मिसाइल दो लक्ष्यों को साधती हुई नजर आती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस समय पर दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति चीन की यात्रा पर हैं। उनकी यह यात्रा चीन के साथ दक्षिण अमेरिका की बढ़ती दोस्ती और कोरियाई प्रायद्वीप पर शांति को बढ़ावा देने के लिए मानी जा रही है। हालांकि, मिसाइल के जरिए उत्तर कोरिया ने अपने इरादे साफ कर दिए हैं।
दक्षिण कोरिया की इंस्टीट्यूट फॉर फार ईस्टर्न स्टडीज के प्रोफेसर लिम ने कहा कि कोरिया और जापान के बीच समुद्र में किए गए इस मिसाइल टेस्ट के जरिए दक्षिण कोरिया और चीन के बीच होने वाली बैठक के पहले तानाशाह की तरफ से चीन को दिया गया संदेश है।
बकौल, लिम ‘उत्तर कोरिया इसके साथ अमेरिका को भी संदेश देना चाहता था कि वह वेनेजुएला नहीं है। यानी अगर अमेरिका, वेनेजुएला जैसा कोई अभियान उत्तर कोरिया के साथ करने की सोचता है, तो ऐसी स्थिति के लिए वह दिखाना चाहता था कि उसकी तरफ से जबरदस्त प्रतिरोध होगा।
किम जोंग उन का जिक्र करते हुए योंसई यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर बोंग यांगशिक ने कहा कि इस समय वेनेजुएला में जो कुछ हुआ है, उसे देखकर सबसे ज्यादा डरने वाला व्यक्ति किम जोंग उन ही है। क्योंकि वह भी एक तानाशाह ही है।
अन्य विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिका द्वारा उत्तर कोरिया में ऐसा कोई हमला करने की संभावना कम है। क्योंकि एक तो उत्तर कोरिया सीधे तौर पर अमेरिका से उलझने से बचता आया है। हालांकि वह धमकी देता रहा है। दूसरी तरफ, वेनेजुएला की तुलना में उत्तर कोरिया की तानाशाही ज्यादा मजबूत और सैन्य शक्ति भी मजबूत है।
