रिपोर्ट में बताया गया है कि फिलहाल रेपो रेट और कोर इन्फ्लेशन के बीच का अंतर करीब 2.8 प्रतिशत है जो पिछले सात वर्षों के औसत 1.1 प्रतिशत से कहीं ज्यादा है। जानकारों का मानना है कि महंगाई के नियंत्रण में रहने और इस बड़े अंतर के कारण RBI के पास तकनीकी और आर्थिक दोनों आधार मौजूद हैं जिनके सहारे वह ब्याज दरों में और कटौती कर सकता है। यही वजह है कि 2026 में रेट कट की संभावना को बाजार पूरी तरह नजरअंदाज नहीं कर रहा है।गौरतलब है कि साल 2025 में RBI ने आर्थिक गतिविधियों को रफ्तार देने के मकसद से ब्याज दरों में कुल 125 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की थी। दिसंबर 2025 में आखिरी बार 0.25 प्रतिशत की कटौती के बाद रेपो रेट घटकर 5.25 प्रतिशत पर आ गया था। अब बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि 2026 में रेपो रेट 5 प्रतिशत से नीचे या उसके आसपास पहुंच सकता है। यह स्तर कर्ज को और सस्ता बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
अगर 2026 में 0.50 प्रतिशत की अतिरिक्त कटौती होती है तो बैंकों और वित्तीय संस्थानों पर लेंडिंग रेट घटाने का दबाव बढ़ेगा। इसका फायदा न सिर्फ नए लोन लेने वालों को मिलेगा बल्कि पहले से कर्ज चुका रहे लोगों की EMI भी कम हो सकती है। खासतौर पर होम लोन और कार लोन की मासिक किस्तें घटने से घरेलू बजट पर दबाव कम होगा। दूसरी ओर कंपनियों को सस्ता कर्ज मिलने से निवेश विस्तार और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि इसका दूसरा पहलू यह है कि फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करने वालों को ब्याज दरों में मामूली गिरावट झेलनी पड़ सकती है।
IIFL कैपिटल की रिपोर्ट के अनुसार ब्याज दरों में नरमी और सरकार के सुधारात्मक कदम मिलकर देश की GDP ग्रोथ को मजबूती दे सकते हैं। बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ बेहतर रहने और वित्तीय हालात मजबूत बने रहने की उम्मीद जताई गई है। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतें 65 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहने का अनुमान है जिससे महंगाई पर नियंत्रण बना रह सकता है। यह स्थिति RBI के लिए रेट कट के पक्ष में एक मजबूत कारक मानी जा रही है।
निवेशकों के लिहाज से भी यह संकेत अहम हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्याज दरों में संभावित कटौती से शेयर बाजार को सहारा मिल सकता है। बैंकिंग रियल एस्टेट और ऑटो सेक्टर के शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है। कुछ विश्लेषक निफ्टी में मौजूदा स्तर से करीब 15 प्रतिशत तक रिटर्न की संभावना जता रहे हैं जबकि स्मॉल कैप शेयरों में भी धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिल रहे हैं। कुल मिलाकर 2026 में ब्याज दरों में कटौती की संभावना आम लोगों कारोबार और बाजार—तीनों के लिए सकारात्मक मानी जा रही है।
