BCCL देश में कोकिंग कोल उत्पादन की अग्रणी कंपनी है। कोकिंग कोल का इस्तेमाल मुख्य रूप से स्टील निर्माण में किया जाता है, जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है। कंपनी को वर्ष 2014 में मिनी रत्नका दर्जा मिला था। इस IPO के जरिए कोल इंडिया लिमिटेड अपनी हिस्सेदारी घटा रही है, जिससे सरकार को विनिवेश के तहत पूंजी प्राप्त होगी।इस इशू के तहत निवेशकों को 600 शेयरों के एक लॉट के लिए आवेदन करना होगा। एंकर निवेशकों के लिए बोली 8 जनवरी को खुलेगी, जबकि आम निवेशक 9 जनवरी से आवेदन कर सकेंगे। पात्र कर्मचारियों के लिए प्रति शेयर ₹1 का डिस्काउंट भी रखा गया है, जो सरकारी कंपनियों के IPO में आम तौर पर देखने को मिलता है। इशू बंद होने के बाद तय समय-सीमा के भीतर शेयरों का आवंटन और लिस्टिंग प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
यह IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल(OFS आधारित है। इसके तहत कुल 46.57 करोड़ शेयर बेचे जाएंगे। चूंकि यह OFS है, इसलिए IPO से जुटाई गई पूरी रकम प्रमोटर कोल इंडिया लिमिटेड को जाएगी, न कि BCCL को। इसका मतलब यह है कि इस इशू से कंपनी को सीधे तौर पर विस्तार, नई खदानों या प्रोजेक्ट्स के लिए कोई ताजा पूंजी नहीं मिलेगी। निवेशकों के लिए यह पहलू समझना बेहद जरूरी है।कंपनी की परिचालन स्थिति की बात करें तो वित्त वर्ष 2025 के आंकड़ों के अनुसार, देश के घरेलू कोकिंग कोल उत्पादन में BCCL की हिस्सेदारी करीब 58.50% है। 1 अप्रैल 2024 तक कंपनी के पास लगभग 7,910 मिलियन टन कोयले का भंडार मौजूद था। BCCL झरिया और रानीगंज कोलफील्ड में फैली 34 खदानों का संचालन कर रही है, जो कुल 288.31 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली हैं। कंपनी का प्रमुख ग्राहक आधार स्टील और पावर सेक्टर से जुड़ा हुआ है।
उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए BCCL ने वर्ष 2021 से हैवी अर्थ मूविंग मशीनरीHEMM के इस्तेमाल को बढ़ाया है। इससे खनन कार्य की रफ्तार में सुधार हुआ है और परिचालन दक्षता भी बेहतर हुई है। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी का प्रदर्शन काफी हद तक सरकारी नीतियों, स्टील उद्योग की मांग और वैश्विक कोयला कीमतों पर निर्भर करता है। इन कारकों में उतार-चढ़ाव से मुनाफे पर असर पड़ सकता है।कोकिंग कोल को स्टील उद्योग की रीढ़ माना जाता है और भारत आज भी अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में घरेलू स्तर पर कोकिंग कोल का उत्पादन करने वाली BCCL की भूमिका रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि आने वाले वर्षों में स्टील सेक्टर की मांग मजबूत बनी रहती है, तो इसका सकारात्मक असर BCCL के कारोबार और निवेशकों की उम्मीदों पर भी दिख सकता है।
