दरअसल तुर्कमान गेट इलाके में हालात की संवेदनशीलता को देखते हुए दिल्ली पुलिस के साथ सीआरपीएफ और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों की तैनाती की गई है। मस्जिद परिसर और आसपास के इलाकों में बैरिकेडिंग कर दी गई है, वहीं हर आने-जाने वाले पर कड़ी नजर रखी जा रही है। दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार जुमे की नमाज के बाद भी सुरक्षा बल इलाके में तैनात रहेंगे। ड्रोन कैमरों और अतिरिक्त सीसीटीवी की मदद से पूरे क्षेत्र की निगरानी की जा रही है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए क्विक रिस्पॉन्स टीमों को भी अलर्ट पर रखा गया है। प्रशासन ने साफ किया है कि कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
तुर्कमान गेट हिंसा की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की टीम तुर्कमान गेट इलाके में अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के तहत फैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास पहुंची थी। इस कार्रवाई का स्थानीय लोगों ने विरोध किया। आरोप है कि बड़ी संख्या में लोगों ने पुलिस और एमसीडी कर्मियों पर पथराव किया, जिसमें 10 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए। हालात काबू से बाहर होते देख पुलिस को हल्का बल प्रयोग, आंसू गैस और लाठीचार्ज करना पड़ा था। घटना के बाद पूरे इलाके को सुरक्षा के मद्देनजर सील कर दिया गया था और बीएनएस की धारा 163 लागू कर दी गई थी, जिसके तहत चार या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक लगाई गई। पुलिस ने इस मामले में दंगा, सरकारी काम में बाधा और हिंसा से जुड़ी धाराओं में कई एफआईआर दर्ज की हैं।
जांच और कानूनी कार्रवाई
दिल्ली पुलिस ने हिंसा की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक और तकनीकी जांच शुरू की है। सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर संदिग्धों की पहचान की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह भी जांच की जा रही है कि कहीं हिंसा किसी संगठित साजिश का हिस्सा तो नहीं थी। अब तक कई लोगों को हिरासत में लिया गया है और आगे की कार्रवाई जारी है। पुलिस कमिश्नर ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि शांति भंग करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही यह भी दोहराया गया कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई थी और इसका उद्देश्य सार्वजनिक व्यवस्था और यातायात को सुचारु बनाना था।
जुमे की नमाज को लेकर मस्जिद की अपील आई सामने
फैज-ए-इलाही मस्जिद के मुख संरक्षक नजमुद्दीन चौधरी ने हालात की नजाकत को देखते हुए लोगों से संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि शांति बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है और किसी भी तरह की अफवाह या उकसावे से बचना चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि संभव हो तो लोग अपने घर या नजदीकी मस्जिद में नमाज अदा करें, ताकि अनावश्यक भीड़ न जुटे। वहीं, दिल्ली पुलिस ने भी नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर फैलने वाली भ्रामक सूचनाओं पर ध्यान न दें। अफवाहों पर रोक लगाने के लिए साइबर सेल को विशेष रूप से सक्रिय किया गया है।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं
तुर्कमान गेट हिंसा और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक हलकों में भी बहस तेज है। कुछ विपक्षी नेताओं ने कार्रवाई के समय और तरीके पर सवाल उठाए हैं, जबकि प्रशासन और सत्तापक्ष का कहना है कि कानून सभी के लिए समान है और हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकती। फिलहाल प्रशासन का कहना है कि तुर्कमान गेट और फैज-ए-इलाही मस्जिद क्षेत्र में स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन एहतियात के तौर पर सुरक्षा व्यवस्था में कोई ढील नहीं दी जा रही। जुमे की नमाज को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। अधिकारियों ने दोहराया कि शांति और सौहार्द बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है और इसी सहयोग से इलाके में सामान्य स्थिति बहाल कराए जाने का प्रयास जारी रहेगा।
