एक विशेष साक्षात्कार में अज़ार ने कहा कि हमास और पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों, खासकर लश्कर-ए-तैयबा, के बीच बढ़ते संपर्क को लेकर इज़रायल को गहरी चिंता है। इजरायल की तरफ से यह प्रतिक्रिया ऐसे वक्त में आई है, जब पाकिस्तान गाजा में इंटरनेशनल फोर्स में शामिल होने पर अमेरिका की प्रतिक्रिया का अभी इंतजार ही कर रहा है।
हमास के खात्मे के बिना कोई व्यवस्था संभव नहीं
इजरायली राजदूत अज़ार ने स्पष्ट तौर पर कहा कि हमास को एक आतंकवादी संगठन के रूप में पूरी तरह खत्म किए बिना गाज़ा के भविष्य को लेकर कोई भी व्यवस्था संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में एक स्थिरीकरण बल (Stabilisation Force) का विचार तब तक निरर्थक है, जब तक हमास को पूरी तरह निष्क्रिय नहीं कर दिया जाता। यह पहली बार है जब इजरायल आधिकारिक तौर पर और खुले तौर पर पाकिस्तानी सेना की भूमिका के खिलाफ सामने आया है।
पाक समेत कई देशों से अमेरिका ने किया था संपर्क
हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका ने गाज़ा में सुरक्षा और पुनर्निर्माण के लिए प्रस्तावित बल में योगदान देने को लेकर पाकिस्तान समेत कई देशों से संपर्क किया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अज़ार ने कहा, “कई देशों ने पहले ही साफ कर दिया है कि वे हमास से लड़ने के लिए अपने सैनिक नहीं भेजना चाहते। ऐसे में यह योजना व्यावहारिक नहीं लगती।” जब उनसे सीधे पूछा गया कि क्या इज़रायल गाज़ा में पाकिस्तानी सेना की मौजूदगी को स्वीकार करेगा, तो उनका जवाब साफ था “नहीं।”
“केवल उन्हीं के साथ काम करेंगे जो भरोसेमंद”
पाकिस्तान की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए इज़रायली राजदूत ने कहा,“देश आमतौर पर उन्हीं के साथ सहयोग करते हैं जिनके साथ उनके भरोसेमंद राजनयिक संबंध हों। इस समय पाकिस्तान के साथ ऐसी स्थिति नहीं है।” इस बयान से इज़रायल की पाकिस्तान को लेकर गहरी अविश्वास की भावना साफ झलकती है।
राजदूत अज़ार के बयान ऐसे समय आए हैं जब हाल ही में यह बात सामने आई है कि हमास के वरिष्ठ कमांडर नाजी ज़हीर पिछले तीन वर्षों से लगातार पाकिस्तान की यात्राएं कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, नाजी ज़हीर ने लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों से कई बैठकें और मुलाकातें की थीं। ये बैठकें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK)में भी हुईं हैं। यह बात भी सामने आ चुकी है कि 7 अक्टूबर को इज़रायल पर हुए हमले के कुछ ही दिनों बाद ज़हीर पेशावर में मौजूद था।अज़ार ने पुष्टि की कि इज़रायली खुफिया एजेंसियां इन गतिविधियों पर करीबी नजर रखे हुए हैं।
