योजना से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, 1500 रुपये प्रतिमाह की यह आर्थिक सहायता केवल उन महिलाओं को मिलेगी जिन्होंने ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी कर ली है। सरकार ने लाभार्थियों के सत्यापन और अपात्र लोगों को योजना से बाहर करने के उद्देश्य से दिसंबर के अंत तक ई-केवाईसी अनिवार्य कर दिया था। जिन खातों का सत्यापन पूरा नहीं हुआ है, उनकी किस्त फिलहाल रोकी जाने की संभावना बनी हुई है।बीते कुछ महीनों में इस योजना के तहत किस्तों के भुगतान में देरी देखी गई है। चुनावी गतिविधियों और तकनीकी कारणों के चलते समय पर राशि ट्रांसफर नहीं हो सकी। पहले यह अनुमान लगाया गया था कि तीन महीनों की बकाया राशि एक साथ जारी होगी, लेकिन हाल ही में केवल एक माह की किस्त ही लाभार्थियों के खातों में पहुंच पाई। इसके बाद दिसंबर और जनवरी की किस्तों को लेकर महिलाओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
मकर संक्रांति को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे संदेशों और पोस्टरों ने उम्मीदें और बढ़ा दी हैं। इनमें दावा किया जा रहा है कि त्योहार से पहले ही दो महीनों की राशि ट्रांसफर कर दी जाएगी। वहीं, विपक्षी दल इस दावे को राजनीतिक प्रचार से जोड़कर देख रहे हैं। प्रशासनिक स्तर पर फिलहाल यही कहा जा रहा है कि भुगतान की प्रक्रिया बजट और तकनीकी मंजूरी के बाद ही आगे बढ़ेगी।लाडकी बहिण योजना राज्य की सबसे बड़ी सामाजिक सहायता योजनाओं में शामिल है। इसके तहत 21 से 65 वर्ष की आयु की उन महिलाओं को मासिक सहायता दी जाती है, जिनकी पारिवारिक वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम होती है। वर्तमान में लगभग 2.4 करोड़ महिलाएं इस योजना से लाभान्वित हो रही हैं, जिससे राज्य सरकार पर हर महीने हजारों करोड़ रुपये का वित्तीय भार पड़ता है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि योजना को लेकर किसी भी प्रकार की अंतिम जानकारी केवल आधिकारिक माध्यम से साझा की जाएगी। लाभार्थियों को सलाह दी गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और अपने बैंक खाते तथा सरकारी पोर्टल पर नियमित अपडेट चेक करते रहें।फिलहाल मकर संक्रांति से पहले दो किस्तें एक साथ मिलने की उम्मीद ने महिलाओं में उत्सुकता बढ़ा दी है। सरकार की ओर से स्पष्ट घोषणा होने के बाद ही यह तय हो पाएगा कि यह राशि कब और किन शर्तों पर खातों में पहुंचेगी।
