मैच के दौरान, जब बांगर ने एक खिलाड़ी के प्रदर्शन पर टिप्पणी की, उसका एक छोटा सा क्लिप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो गया। देखते ही देखते यह बयान चर्चा का केंद्र बन गया और ट्विटर (X), फेसबुक और इंस्टाग्राम पर यूजर्स ने अपनी-अपनी राय देना शुरू कर दिया। कई दर्शकों ने कहा कि कमेंट्री करते समय शब्दों का चयन बेहद संवेदनशील होना चाहिए, खासकर जब करोड़ों लोग लाइव प्रसारण देख रहे हों।
वहीं, संजय बांगर के समर्थन में भी बड़ी संख्या में लोग सामने आए हैं। उनके समर्थकों का कहना है कि बयान को संदर्भ से अलग करके पेश किया गया और इसका गलत अर्थ निकाला जा रहा है।
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर क्रिकेट कमेंट्री में भाषा और शब्दों की मर्यादा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे पहले भी कई पूर्व खिलाड़ी और कमेंटेटर अपने बयानों को लेकर विवादों में रह चुके हैं। लाइव टीवी पर बोले गए शब्द अक्सर रिकॉर्ड होकर सोशल मीडिया पर वायरल हो जाते हैं, जिससे किसी भी टिप्पणी की गंभीरता कई गुना बढ़ जाती है।
फिलहाल, संजय बांगर या ब्रॉडकास्टिंग चैनल की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
इस बीच, भारत और न्यूजीलैंड के बीच चल रहे मुकाबले की चर्चा भी इस विवाद के कारण थोड़ी पीछे छूट गई। जहां एक ओर मैदान पर खिलाड़ियों का प्रदर्शन सुर्खियां बटोर रहा है, वहीं दूसरी ओर कमेंट्री बॉक्स से उठा यह बयान सोशल मीडिया पर बहस का केंद्र बन गया है।
कुल मिलाकर, यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि सार्वजनिक मंच पर बोले गए हर शब्द की जिम्मेदारी होती है। खासकर क्रिकेट जैसे लोकप्रिय खेल में, जहां खिलाड़ी, कमेंटेटर और दर्शक भावनात्मक रूप से जुड़े होते हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि संजय बांगर या ब्रॉडकास्टर इस विवाद पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या इससे कमेंट्री की भाषा को लेकर कोई नई गाइडलाइन सामने आती है या नहीं।
