वडोदरा में खेले गए पहले वनडे में भारत को जीत के लिए 301 रनों का लक्ष्य मिला था। मैच बेहद अहम मोड़ पर था, तभी चोटिल वॉशिंगटन सुंदर को बल्लेबाजी के लिए भेजा गया। सुंदर ने 7 गेंदों में नाबाद 7 रन बनाए और केएल राहुल के साथ मिलकर भारत को जीत दिलाई। हालांकि जीत के तुरंत बाद ही उन्हें पूरी सीरीज से बाहर कर दिया गया और उनकी जगह आयुष बदोनी को टीम में शामिल किया गया। इसी फैसले ने कई सवाल खड़े कर दिए।
कैफ ने इस दौरान शुभमन गिल का उदाहरण भी दिया। उन्होंने याद दिलाया कि साउथ अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में जब शुभमन गिल चोटिल थे, तब टीम मैनेजमेंट ने उन्हें पूरी तरह आराम दिया था। कोलकाता टेस्ट में टीम को महज 20–30 रन की जरूरत थी, फिर भी गिल को बल्लेबाजी के लिए नहीं भेजा गया ताकि उनकी चोट न बढ़े। कैफ का कहना है कि अगर वही सोच उस समय सही थी, तो वॉशिंगटन सुंदर के मामले में उसे क्यों नजरअंदाज किया गया।
पूर्व भारतीय बल्लेबाज ने साफ कहा कि मैच जीत जाना इस फैसले को सही नहीं ठहरा सकता।
कैफ ने यह भी कहा कि उस समय टीम इंडिया के पास अन्य विकल्प मौजूद थे। रन रेट अगर प्रति गेंद एक रन के आसपास था, तो कुलदीप यादव, मोहम्मद सिराज या प्रसिद्ध कृष्णा जैसे खिलाड़ियों को भी बल्लेबाजी के लिए भेजा जा सकता था। चोटिल खिलाड़ी को तभी मैदान में उतारना चाहिए, जब कोई और विकल्प बिल्कुल न बचे।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसे फैसलों से खिलाड़ी की छोटी चोट भी लंबी हो सकती है। एक हफ्ते या दस दिन में ठीक होने वाली चोट 20–25 दिन तक खिंच सकती है, जो आगे चलकर टीम के लिए बड़ा नुकसान साबित हो सकती है।
मोहम्मद कैफ का साफ मानना है कि वॉशिंगटन सुंदर को बल्लेबाजी के लिए भेजना एक गलत और जोखिम भरा फैसला था। इस पूरे मामले ने टीम इंडिया के मैनेजमेंट की सोच और फैसलों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब आने वाले दिनों में जरूरी माना जा रहा है।
