अरुण गोविल की शुरुआत
12 जनवरी 1958 को उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में जन्मे अरुण गोविल ने अभिनय में अपने करियर की शुरुआत की थी। लेकिन उनका असली मुकाम तब आया जब उन्होंने दूरदर्शन के प्रसिद्ध धारावाहिक रामायण में भगवान राम का किरदार निभाया। यह धारावाहिक भारतीय टेलीविजन का एक ऐतिहासिक पल था और अरुण गोविल का राम के रूप में अवतार लेने के बाद वह हर घर के प्रिय बन गए।राम के रूप में गोविल की भूमिका इतनी प्रभावशाली थी कि आज भी उन्हें लोग सम्मान और श्रद्धा की नजर से देखते हैं। जब भी वह सार्वजनिक स्थानों पर जाते हैं, लोग उन्हें सम्मान देने के लिए उनके चरणों में झुक जाते हैं। यह सम्मान केवल उनके अभिनय के कारण नहीं बल्कि उस सादगी शुचिता और आदर्श के कारण था, जिसे उन्होंने अपने जीवन में आत्मसात किया।
चेन स्मोकिंग की आदत और उसका असर
वहीं, इस अभिनेता का जीवन केवल सादगी और आदर्शों का ही नहीं था। जब वह एक युवा अभिनेता थे, तब उन्होंने चेन स्मोकिंग की आदत लगा ली थी। यह आदत उनकी शख्सियत का एक ऐसा हिस्सा बन चुकी थी जिसे वह आसानी से छोड़ नहीं पा रहे थे। यह आदत उनकी सेहत के लिए तो हानिकारक थी ही साथ ही उनके सार्वजनिक छवि पर भी इसका प्रभाव पड़ रहा था। लेकिन वह इस पर पूरी तरह से नियंत्रण नहीं पा रहे थे, क्योंकि यह उनकी आदत का हिस्सा बन चुका था।
फैन की फटकार और जीवन में बदलाव
अरुण गोविल के जीवन में एक मोड़ तब आया, जब एक फैन ने उन्हें उनके सार्वजनिक स्थान पर धूम्रपान करते हुए देखा। उस फैन ने उन्हें न केवल फटकार लगाई बल्कि उनकी आदत को लेकर एक कड़ा संदेश दिया। उसने कहा आप तो भगवान राम का किरदार निभाते हैं लेकिन आपकी यह आदत भगवान राम के आदर्शों के खिलाफ है। इस फटकार ने गोविल को चौंका दिया और वह अपने जीवन में बदलाव लाने के लिए प्रेरित हो गए इस फटकार का प्रभाव इतना गहरा था कि अरुण गोविल ने सिगरेट छोड़ने का संकल्प लिया। यह कदम उनके जीवन का एक बड़ा मोड़ था। उन्होंने न केवल अपने स्वास्थ्य के लिए बल्कि अपनी सार्वजनिक छवि और आदर्शों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए धूम्रपान छोड़ने का फैसला लिया।
सादगी की मिसाल और जीवन की दिशा
अरुण गोविल का जीवन केवल एक अभिनेता का जीवन नहीं था। उन्होंने अभिनय को एक तपस्या के रूप में देखा, जिसमें न केवल उनकी कला थी, बल्कि उनके भीतर की सादगी और शुचिता भी थी। उन्होंने कभी भी अपने अभिनय करियर को महज मनोरंजन का जरिया नहीं माना। उनके लिए यह एक मिशन था, जिसे उन्होंने पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ निभाया। आज भी जब वह किसी सार्वजनिक मंच पर जाते हैं, तो लोग उन्हें आदर्श मानते हैं और उनके कदमों में श्रद्धा से झुकते हैं। यह सम्मान उनकी अभिनय कला से कहीं अधिक उनके जीवन के आदर्शों और सादगी के लिए है।अरुण गोविल की कहानी यह साबित करती है कि एक अभिनेता का जीवन केवल पर्दे पर दिखाए गए किरदार तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह अपनी निजी आदतों, व्यवहार और जीवन के सिद्धांतों से भी लोगों के दिलों में स्थान बनाता है।
