शिवसेना के मुख्य राष्ट्रीय समन्वयक अभिषेक वर्मा ने कहा कि पार्टी अब यूपी में मजबूत स्थिति में है और इसे और बेहतर किया जाएगा। वर्मा ने स्पष्ट किया कि शिवसेना केवल विधानसभा चुनाव में ही नहीं, बल्कि जिला पंचायत, नगर पंचायत और निकाय चुनावों में भी सक्रिय होगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिवसेना की एंट्री यूपी के राजनीतिक परिदृश्य में नई हलचल पैदा करेगी। सुभासपा, निषाद पार्टी और अपना दल पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि वे पंचायत चुनाव अकेले लड़ेंगे और विधानसभा चुनाव के लिए रणनीति तैयार कर रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि किस दल की रणनीति प्रभावित होती है और किस सीट पर खेल बदल सकता है।
उत्तर भारतीयों के साथ महाराष्ट्र में कथित भेदभाव और मारपीट के सवाल पर वर्मा ने स्पष्ट किया कि शिवसेना गुंडागर्दी नहीं करती।
शिवसेना की सक्रियता से उत्तर प्रदेश में हिंदू वोट बैंक में हलचल और एनडीए के गठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर नई रणनीति बन सकती है। बीजेपी के लिए यह चुनौती और अवसर दोनों है, क्योंकि गठबंधन में सीटों का बंटवारा और उम्मीदवार चयन अब और अधिक संवेदनशील मुद्दा बन गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि 2027 विधानसभा चुनाव में शिवसेना की भागीदारी राज्य में राजनीतिक समीकरण बदल सकती है। अब यह देखना रोचक होगा कि कौन सा दल इस नए मोड़ का फायदा उठाता है और किसकी रणनीति प्रभावित होती है। राजनीतिक हलचल और गठबंधन की राजनीति यूपी के मतदाताओं के लिए भी बेहद दिलचस्प और निर्णायक साबित हो सकती है।
