दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया, “यह मेरे हाथ में नहीं है। पार्टी का फैसला जो भी होगा, वह सर्वमान्य होगा। इतना जरूर मैं कह सकता हूं कि मैं अपनी राज्यसभा सीट खाली कर रहा हूं।” उनके इस बयान को कांग्रेस के भीतर बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस बार दिग्विजय सिंह राज्यसभा के लिए नहीं जाएंगे, जिससे मध्य प्रदेश की सियासत में नए समीकरण बन सकते हैं।
दिग्विजय सिंह का वर्तमान कार्यकाल इस वर्ष जून में समाप्त हो रहा है। राज्य में कुल तीन राज्यसभा सीटों पर चुनाव होने हैं। कांग्रेस के पास 64, बीएपी के पास 1 और भारतीय जनता पार्टी के पास 165 विधायक हैं। इस हिसाब से राजनीतिक समीकरण, दलों की ताकत और उम्मीदवारों का चयन सभी के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है।
राज्यसभा सीटों की इस लड़ाई में अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति समुदाय से उम्मीदवार का चयन पार्टी की छवि और स्थानीय समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है। दिग्विजय सिंह के फैसले के बाद अब कांग्रेस के नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच सस्पेंस और रणनीति का माहौल है। राजनीतिक विश्लेषक इसे मध्य प्रदेश की सियासत में एक नया मोड़ भी मान रहे हैं, क्योंकि राज्यसभा चुनाव हमेशा पार्टी की भीतरी ताकत और प्रभाव को दिखाने का मौका होते हैं।
इस घटना ने साफ कर दिया है कि कांग्रेस राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन में सामुदायिक समीकरणों और अनुभव को ध्यान में रखते हुए रणनीति बना रही है। दिग्विजय सिंह का यह कदम पार्टी के भीतर नए नेताओं के लिए अवसर और सियासी समीकरणों में बदलाव ला सकता है। इस पूरे घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश की सियासत को रोचक और रणनीतिक मोड़ दे दिया है, और अब सबकी निगाहें आगामी राज्यसभा चुनाव पर टिकी हुई हैं।
