मध्य प्रदेश जैसे राज्य में हर साल लाखों लोग सड़क पर मछली और मछली पकड़ने का शिकार करते हैं, जिनमें से कई मरीज़ समय पर इलाज न मिलने के कारण अपनी जान गंवा देते हैं। वर्तमान समय में आधुनिक जांच तकनीक जैसे सीबीआर्इ, भारी और बड़े पैमाने पर उपकरण उपलब्ध हैं। मरीज को प्राथमिक केंद्र से लेकर बड़े शहर तक पहुंचने के समय में पता चलता है और टैब तक उनकी स्थिति गंभीर हो जाती है। इससे न सिर्फ सही इलाज में देरी होती है, बल्कि जान का खतरा भी बढ़ जाता है।
नई स्कॉटलैंड 3डी एक्स-रे यूनिट इन समस्याओं का समाधान करेगी। यह यूनिट आर्टिफिशियल क्लिनिक और एडवांस्ड कंप्यूटर इंजीनियरिंग पर आधारित होगी। इसमें एक्स-रे इमेज को मल्टी-एंगल से अलग किया जाएगा और एआई एल्गोरिड्म के जरिए उसे थ्री-डी डॉक्यूमेंट में कन्वर्ट किया जाएगा। रेड सीक्वेंट स्कैन की तुलना में लगभग 500 गुना कम होगा, और डॉक्टर मोबाइल या स्क्रीन पर छवि देखकर तुरंत चोट की वास्तविक समझ स्थिति देखेंगे।
इस कंपनी को विशेष रूप से आपदा और आपदा के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह पूरी तरह से एक तरह का ऑर्केस्ट्रा होगा और इसका इस्तेमाल मूर्तिकार या घटना स्थल पर ही किया जाता है। एम्स भोपाल के मैक्सोफेसियल सर्जन डॉ. बी.एल. सोनी और डॉ. असलहा राय इस प्रोजेक्ट के प्रमुख इंजीनियर हैं। उनका कहना है कि इस तकनीक से न केवल ग्रामीण इलाकों में आबादी की जान बचाई जा सकेगी, बल्कि चिकित्सा शिक्षा और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में भी नई ताकत का निर्माण होगा।
