तेजप्रताप यादव ने साफ शब्दों में कहा कि उनके लिए सबसे बड़ी और संतोष की बात यह रही कि उनके पिता और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव कार्यक्रम में पहुंचे। उन्होंने कहा, “पिता जी का आना और उनका आशीर्वाद मिलना ही मेरे लिए सबसे बड़ी जीत है। उससे ऊपर कुछ नहीं।” तेजप्रताप ने बताया कि चूड़ा-दही भोज में सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों खेमों के कई बड़े नेता पहुंचे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी निमंत्रण भेजा गया था और कई दलों के नेताओं ने आकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
इस मौके पर तेजप्रताप यादव ने बड़ा राजनीतिक दावा करते हुए कहा कि लालू यादव की मूल और असली पार्टी जनशक्ति जनता दल है। उन्होंने अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव को खुली सलाह देते हुए कहा कि उन्हें राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) का विलय जनशक्ति जनता दल में कर देना चाहिए। तेजप्रताप का यह बयान बिहार की सियासत में हलचल पैदा करने वाला माना जा रहा है।
तेजप्रताप यादव यहीं नहीं रुके। उन्होंने दावा किया कि उन्हें बीजेपी समेत कई राजनीतिक दलों से ऑफर मिल चुके हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि आगे किसके साथ जाना है, इसका फैसला वे खुद लेंगे। उन्होंने कहा, “जो बिहार के हित में काम करेगा, जनता की बात करेगा, जनशक्ति जनता दल उसी का साथ देगा।”
गौरतलब है कि आरजेडी से बाहर होने के बाद तेजप्रताप यादव ने जनशक्ति जनता दल का गठन किया था। उन्होंने इसी पार्टी के सिंबल पर महुआ सीट से बिहार विधानसभा 2025 का चुनाव भी लड़ा, हालांकि जीत हासिल नहीं कर सके। इसके बावजूद तेजप्रताप अपने बयानों और सियासी गतिविधियों के जरिए लगातार यह संकेत दे रहे हैं कि वे बिहार की राजनीति में किसी भी कीमत पर अपनी अलग पहचान और मजबूत भूमिका बनाए रखने के मूड में हैं।
