यह हृदयविदारक घटना वर्ष 2023 में आठनेर थाना क्षेत्र में घटित हुई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार दोनों दोषियों ने एक नाबालिग छात्रा को अपनी हवस का शिकार बनाया था। वारदात के बाद डरी-सहमी पीड़िता ने जब परिजनों को आपबीती सुनाई तो पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मामला दर्ज किया। पुलिस ने विवेचना के दौरान वैज्ञानिक साक्ष्य और गवाहों के बयान एकत्रित कर न्यायालय में पेश किए। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रकरण की सुनवाई स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में चली जहाँ अभियोजन ने प्रभावी पैरवी करते हुए दोषियों के कृत्य को जघन्य श्रेणी का बताया।
विशेष न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद पाया कि आरोपियों ने न केवल कानून का उल्लंघन किया बल्कि एक मासूम के भविष्य और उसकी गरिमा को भी गंभीर चोट पहुँचाई। कोर्ट ने दोनों अभियुक्तों को सामूहिक दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया। सजा सुनाते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे अपराध समाज के लिए कलंक हैं और अपराधियों के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जा सकती। दोषियों को ‘अंतिम सांस तक’ जेल की सलाखों के पीछे रहने का आदेश दिया गया है। साथ ही अदालत ने दोनों पर 21-21 हजार रुपए का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की यह राशि अदा न करने पर उन्हें अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। बैतूल पुलिस और अभियोजन की इस सफलता को महिला सुरक्षा की दिशा में एक बड़ी जीत माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे त्वरित और सख्त फैसलों से अपराधियों के हौसले पस्त होंगे और पीड़ित परिवारों का न्याय प्रणाली पर विश्वास और अधिक मजबूत होगा।
