ग्रुप में बताया गया कि होटल और अन्य व्यवसायिक संस्थानों को ऑनलाइन रेटिंग देनी होगी और इसके बदले अच्छा भुगतान मिलेगा। शुरुआत में अमन से केवल 300 रुपए जमा कराए गए और टास्क पूरा होने पर उसके अकाउंट में 500 रुपए ट्रांसफर कर दिए गए। यह छोटा मुनाफा अमन के भरोसे को मजबूत करने का जरिया बना।इसके बाद ठगों ने बड़े टास्क का ऑफर दिया और अमन से 5 हजार रुपए जमा कराए गए। जैसे-जैसे वह टास्क करता गया, उसके अकाउंट में रकम बढ़ती दिखाई देने लगी। हालांकि, जब उसने राशि निकालने की कोशिश की, तो ट्रांजैक्शन पूरा नहीं हो सका। ग्रुप एडमिन ने कहा कि रकम निकालने के लिए और पैसे जमा करना जरूरी है।
अकाउंट में बढ़ती रकम के लालच में अमन बार-बार पैसे ट्रांसफर करता गया। अलग-अलग खातों में कुल 3.50 लाख रुपए भेजने के बावजूद उसे पैसा नहीं मिला। इसके अलावा, ठगों ने उस पर और पैसे जमा करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया और टास्क अधूरे रहने पर कोर्ट केस में फंसाने की धमकी भी दी।तब जाकर अमन को ठगी का एहसास हुआ। उसने तुरंत मुरार थाना पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस के अनुसार यह एक संगठित साइबर फ्रॉड का मामला है, जिसमें डिजिटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग किया गया है।
मुरार थाना पुलिस ने बताया कि मामले की जांच में मोबाइल नंबर, बैंक खातों और टेलीग्राम ग्रुप से जुड़े तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। पुलिस ने जनता से अपील की है कि वे घर बैठे कमाई या बिना मेहनत मुनाफे के दावों से सतर्क रहें। किसी भी अनजान लिंक या ग्रुप से जुड़ने से पहले पूरी जांच करना बेहद जरूरी है।विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे फ्रॉड में ज्यादातर छात्र और युवा आसानी से फंस जाते हैं, क्योंकि शुरुआती छोटे मुनाफे का लालच उन्हें बड़ा नुकसान उठाने के लिए प्रेरित करता है। इस घटना ने एक बार फिर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सतर्क रहने की जरूरत को उजागर किया है।
