गुस्ल की रस्म से हुई शुरुआत
शाहजहां के 371वें उर्स के पहले दिन परंपरा के अनुसार गुस्ल की रस्म अदा की गई। इसके बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और उर्स कमेटी के सदस्यों ने फलों की चादर चढ़ाई। उर्स का आयोजन 17 जनवरी तक चलेगा।
16 जनवरी को संदल की रस्म और कव्वाली का आयोजन होगा।
17 जनवरी को चारदपोशी की रस्म अदा की जाएगी, जिसमें लगभग 1,720 मीटर लंबी चादर चढ़ाई जाएगी। इस दिन लंगर का भी वितरण होगा।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम, फिर भी दिखीं अव्यवस्थाएं
नि:शुल्क प्रवेश के चलते दिनभर लंबी कतारें लगी रहीं। सुरक्षा बलों ने भीड़ प्रबंधन के लिए व्यापक इंतजाम किए, लेकिन पर्यटकों की संख्या अधिक होने से कई जगह अव्यवस्थाएं भी नजर आईं।
मुख्य गुंबद के बाहर बड़ी संख्या में पर्यटकों ने जूते-चप्पल उतार दिए, जबकि नियमों के अनुसार जूते ऊपर ले जाने की अनुमति नहीं है। कुछ लोग उद्यान में घूमते भी दिखाई दिए, जिन्हें सुरक्षाकर्मियों ने समझाकर रोका।
भीड़ में बिछड़े लोग, पुलिस ने मिलवाया
भारी भीड़ के बीच करीब तीन दर्जन बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग अपने परिजनों से बिछड़ गए। ताज सुरक्षा पुलिस और सीआईएसएफ के जवानों ने तत्परता दिखाते हुए सभी को खोजकर सुरक्षित उनके परिजनों से मिलवाया।
उर्स का विरोध, पुतला दहन
उर्स के आयोजन को लेकर अखिल भारतीय हिंदू महासभा ने विरोध जताया। महासभा के पदाधिकारियों ने एएसआई कार्यालय के बाहर पुतला दहन कर नारेबाजी की। इस दौरान प्रांतीय अध्यक्ष मीना दिवाकर सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।
आज दोपहर दो बजे के बाद फ्री एंट्री
शुक्रवार होने के कारण ताजमहल सुबह से दोपहर दो बजे तक आम पर्यटकों के लिए बंद रहेगा। इसके बाद पर्यटकों को नि:शुल्क प्रवेश मिलेगा और असली कब्रों के दर्शन भी कराए जाएंगे। हालांकि, स्थानीय नमाजियों के लिए प्रवेश की व्यवस्था पहले की तरह ही रहेगी।
उर्स के दौरान ताजमहल में उमड़ रही भीड़ यह साबित कर रही है कि इतिहास, आस्था और विरासत का यह संगम आज भी लोगों को उतनी ही शिद्दत से अपनी ओर खींचता है।
