ढाका। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के अंतरिम अध्यक्ष तारिक रहमान ने पूर्व बांग्लादेश आर्मी अधिकारी और भारत-विरोधी ब्रिगेडियर जनरल अमन आजमी से मुलाकात की। अमन आजमी विवादास्पद जमात नेता गुलाम आजम के बेटे हैं, जिससे बीएनपी के चुनाव के बाद के लक्ष्यों पर सवाल उठ रहे हैं। बुधवार शाम ढाका में यह मुलाकात हुई। इससे बीएनपी के पाकिस्तान और उसकी जासूसी एजेंसी ISI के साथ भविष्य के संबंधों पर संदेह पैदा होता है। सूत्रों के अनुसार, ऐसे कदम भारत की सुरक्षा चिंताओं के लिए नुकसानदेह साबित हो सकते हैं।
तारिक रहमान ने हाल ही में अपनी नई छवि में भारत के प्रति स्वागत योग्य दिखाई है, जो यह संकेत देता है कि अगर उन्हें प्रधानमंत्री चुना जाता है तो वे सामान्य साझेदारी स्थापित करने के लिए इच्छुक हैं। हालांकि, जानकार कहते हैं कि उनके पुराने आईएसआई और जमात-ए-इस्लामी से संबंध फिर से उभर सकते हैं। रहमान के भविष्य के कदमों पर नजर रखने की जरूरत है क्योंकि जमात किसी भविष्य की सरकार में शामिल होने के लिए उतावली दिख रही है।
अमन आजमी के पिता कौन थे
गुलाम आजम 1971 के मुक्ति युद्ध के दौरान बांग्लादेश की जमात-ए-इस्लामी पार्टी के प्रमुख नेता थे। उन्होंने बांग्लादेश की स्वतंत्रता का सक्रिय रूप से विरोध किया और पाकिस्तानी सेना के साथ सहयोग किया। उन्होंने प्रो-पाकिस्तान पीस कमेटियों का गठन और नेतृत्व किया, जो रजाकारों, अल-बद्र और अल-शम्स जैसे क्रूर अर्धसैनिक समूहों के लिए भर्ती करते थे। ये समूह युद्ध अपराधों, नरसंहार और बुद्धिजीवियों की हत्या के लिए जिम्मेदार थे।
बाद में गुलाम आजम के खिलाफ बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय अपराध अदालत में मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए मुकदमा चलाया गया और दोषी ठहराया गया। आजम को 90 साल की सजा सुनाई गई, लेकिन 2013 में 91 साल की उम्र के कारण उन्हें मृत्युदंड से छूट दी गई। 2014 में उनकी मृत्यु हो गई। अमन आजमी शेख हसीना के शासन के अंतिम चरण में गुमनाम रहे, लेकिन उनके हटाए जाने के तुरंत बाद वे फिर से सक्रिय हो गए। रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2024 से उन्होंने कई सीनियर आर्मी अधिकारियों के खिलाफ अपहरण और हत्याओं में शामिल होने के आरोप लगाने में अहम भूमिका निभाई।
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सऊदी अरब ने अमेरिकी ऐक्शन का किया स्वागत, मुस्लिम ब्रदरहुड की शाखाएं आतंकवादी संगठन घोषित
रियाद । सऊदी अरब ने अमेरिका के उस फैसले का स्वागत किया है, जिसमें मुस्लिम ब्रदरहुड की मिस्र, जॉर्डन और लेबनान की शाखाओं को आतंकवादी संगठन घोषित किया गया है। सऊदी विदेश मंत्रालय ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि यह कदम उग्रवाद और आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को मजबूत करता है तथा क्षेत्रीय सुरक्षा, स्थिरता और अरब देशों की समृद्धि को बढ़ावा देता है।
अमेरिकी ट्रेजरी और स्टेट डिपार्टमेंट ने 13 जनवरी 2026 को यह घोषणा की थी। अमेरिका ने मिस्र और जॉर्डन की मुस्लिम ब्रदरहुड शाखाओं को ‘स्पेशली डेजिग्नेटेड ग्लोबल टेररिस्ट’ और लेबनान की शाखा (अल-जमाआ अल-इस्लामिया) को ‘फॉरेन टेररिस्ट ऑर्गनाइजेशन’ घोषित किया। अमेरिका का आरोप है कि ये शाखाएं हमास को समर्थन देती हैं, आतंकवादी गतिविधियों में शामिल हैं, हथियार बनाती हैं (जैसे रॉकेट और ड्रोन), लड़ाकों की भर्ती करती हैं और क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डालती हैं। यह फैसला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नवंबर 2025 में जारी कार्यकारी आदेश पर आधारित है, जिसके तहत मुस्लिम ब्रदरहुड की कुछ शाखाओं को निशाना बनाया गया।
सऊदी विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा- सऊदी अरब का विदेश मंत्रालय अमेरिका द्वारा मिस्र, जॉर्डन और लेबनान में मुस्लिम ब्रदरहुड की शाखाओं को आतंकवादी समूह घोषित करने का स्वागत करता है। मंत्रालय ने जोर दिया कि सऊदी अरब उग्रवाद और आतंकवाद की सभी रूपों की निंदा करता है तथा अरब देशों, क्षेत्र और विश्व की सुरक्षा, स्थिरता एवं समृद्धि के लिए हर संभव सहयोग का समर्थन करता है।
यह कदम मध्य पूर्व में मुस्लिम ब्रदरहुड के प्रति विभाजित रुख को दर्शाता है। मिस्र ने 2013 से, सऊदी अरब, यूएई और बहरीन ने इसे आतंकवादी संगठन घोषित किया हुआ है, जबकि कतर और तुर्की जैसे देशों में इसका प्रभाव अधिक है। मिस्र ने भी इस अमेरिकी फैसले का स्वागत किया और इसे उग्र विचारधारा पर मजबूत प्रहार बताया। मुस्लिम ब्रदरहुड की मिस्र शाखा ने इस फैसले को खारिज किया और कहा कि यह बिना किसी ठोस सबूत के लिया गया है।
