
नर्मदापुरम 19 जनवरी 2026 (हिन्द संतरी ) जब होशंगाबाद नगर की बसावट हुई तभी से यहाँ के नागरिकों के निस्तार का पानी नर्मदा में मिलते हुए आ रहा है, यानी नर्मदापुरम का इतिहास 1000 साल पुराना है तो तभी से यहाँ का यह नाला अस्तित्व में आया है किन्तु सेठानीघाट और कोरी घाट का निर्माण होने के बात भी यह नाला जीवित था लेकिन वर्ष 1978 में पहली बार नर्मदाजयंती महोत्सव मना तब नागरिकों का ध्यान पहली बार इस पर गया और अगले दो सालों में यह नाला बंद करने के लिए कांग्रेस सरकार ने काम किया जिसमें शहर की सड़कों के बीच से मोटा पाइप लाइन डालकर लेडिया बाजार में इस निस्तार के पानी को एकत्र कर बड़े बड़े फिल्टर प्लांट लगाकर पानी साफ कर उसे नर्मदा में मिलाये जाने का काम शुरू हुआ जो बाद में राजनैतिक कारणों एव देखरेख के अभाव में वह फ़िल्टर प्लांट बंद होने से नाला फिर से नर्मदा में मिलने लगा|
प्रदेश की सरकारों सहित नगरपालिका परिषदों में यहाँ नाला मुद्ददा बना रहा किन्तु सरकारों के सारे प्रयास विफल रहे | अब उसी नाले को लेकर एनी मुद्दे शामिल कर कांग्रेस का विरोध प्रखर हो गया है, इसलिए कांग्रेस ने नर्मदा में मिलने वाला यह नाला में कोरीघाट और अन्य घाटों पर शहर की घटनाओं का गंदा पानी एक नाले के रूप में मां नर्मदा में मिल रहा है और इस पानी में हम सब नहाते हैं इसका विरोध शुरू किया है और डेढ़ लाख लोगों के हस्ताक्षर करवा के प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को सौंपने सहित देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पहुंचाया जाएगा कि नगर पालिका के द्वारा यहां मां नर्मदा की नर्मदा जयंती मनाई जाती है और यह आस्था का केंद्र भी है हिंदू धर्म के लिए और विगत 20 वर्षों से भारतीय जनता पार्टी की नगर पालिका और कांग्रेस नगर पालिका के साथ-साथ प्रदेश में सरकार भी भारतीय जनता पार्टी की है और इस जल मंच पर नर्मदा जयंती पर प्रदेश के मुख्यमंत्री आते हैं और बड़ी-बड़ी घोषणा कर कर चले जाते मगर गंदे नाले की कोई व्यवस्था नहीं है आज तक इसका कांग्रेस पार्टी विरोध करती है और आम जनता से सहयोग चाहती है कि वह हस्ताक्षर करके अपनी बात मुख्यमंत्री तक पहुंचाएं
