हिंदू पक्ष: सूर्योदय से दोपहर 1:00 बजे तक पूजा-अर्चना। मुस्लिम पक्ष: दोपहर 1:00 बजे से 3:00 बजे तक जुमे की नमाज। दोबारा हिंदू पक्ष: दोपहर 3:30 बजे से सूर्यास्त तक पुनः पूजा का अधिकार। दिग्विजय सिंह ने मांग की है कि प्रशासन इन नियमों का सख्ती से पालन कराए और किसी भी तरह का सांप्रदायिक उन्माद फैलाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करे। उन्होंने प्रदेश की जनता से आपसी भाईचारा बनाए रखने की भी भावुक अपील की है। किले में तब्दील हुई भोजशाला: त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरा बसंत पंचमी पर किसी भी अप्रिय स्थिति को टालने के लिए धार जिला प्रशासन और पुलिस ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं। भोजशाला परिसर और उसके आसपास के संवेदनशील इलाकों को भारी पुलिस बल की तैनाती के साथ सुरक्षित किया गया है:
बैरिकेडिंग: भोजशाला के मुख्य प्रवेश द्वार के पास स्थित दरगाह और कब्रिस्तान वाले क्षेत्र को लोहे के बैरिकेड्स लगाकर पूरी तरह से पैक कर दिया गया है। जिग-जैग व्यवस्था: भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पूरे परिसर में जिग-जैग बैरिकेडिंग की गई है ताकि श्रद्धालु और नमाजी कतारबद्ध तरीके से आ-जा सकें। ड्रोन और CCTV: पूरे क्षेत्र की निगरानी ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी के जरिए की जा रही है। सादे कपड़ों में भी पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है ताकि संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा सके।
ऐतिहासिक विवाद और वर्तमान स्थिति भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी मां सरस्वती का मंदिर मानता है जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला की मस्जिद कहता है। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार मंगलवार को हिंदू पूजा करते हैं और शुक्रवार को मुस्लिम नमाज अदा करते हैं। बसंत पंचमी पर यह विवाद तब गहरा जाता है जब यह पर्व शुक्रवार को पड़ता है क्योंकि दोनों पक्ष पूरे दिन के लिए परिसर पर अपना अधिकार चाहते हैं। प्रशासन के लिए 23 जनवरी की तारीख अग्निपरीक्षा के समान है जहाँ उन्हें धार्मिक आस्था और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखना होगा।
