स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु प्रतिबद्धता
ड्राफ्ट नीति भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं के अनुरूप भी है। इसके तहत 2030 तक कार्बन उत्सर्जन की तीव्रता को 2005 के स्तर से 45 प्रतिशत कम करने और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने की योजना है। इसके लिए स्वच्छ और कम कार्बन वाली ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ना जरूरी बताया गया है।
राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर योजना
विद्युत मंत्रालय ने बताया कि नीति लागू होने के बाद यह 2005 की एनईपी की जगह लेगी। इसके तहत बिजली की मांग को समय पर पूरा करने के लिए डिस्कॉम और एसएलडीसी राज्य स्तर पर रिसोर्स एडिक्वेसी (आरए) प्लान तैयार करेंगे। वहीं, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) पूरे देश के लिए एक राष्ट्रीय योजना बनाएगा।
बिजली दरों और सब्सिडी सुधार
ड्राफ्ट नीति में कहा गया है कि बिजली टैरिफ को उपयुक्त इंडेक्स से जोड़ा जाना चाहिए, जिससे हर साल अपने आप संशोधन हो सके। इसके साथ ही फिक्स्ड लागत की भरपाई धीरे-धीरे डिमांड चार्ज के जरिए की जाएगी, ताकि अलग-अलग उपभोक्ताओं पर सब्सिडी का बोझ कम हो।
उद्योगों के लिए राहत और प्रतिस्पर्धा बढ़ाना
नीति में सुझाव दिया गया है कि मैन्युफैक्चरिंग उद्योग, रेलवे और मेट्रो रेलवे को क्रॉस-सब्सिडी और अतिरिक्त शुल्क से छूट दी जाए। इससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी। साथ ही जिन उपभोक्ताओं का बिजली लोड 1 मेगावाट या उससे अधिक है, उनके लिए कुछ मामलों में यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन से छूट दी जा सकती है।
विवाद निपटान और उपभोक्ता संरक्षण
ड्राफ्ट नीति में विवाद निपटान व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया है, ताकि बिजली से जुड़े विवाद जल्दी सुलझें और उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ कम हो।
नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा
नीति में रिन्यूएबल ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए बाजार आधारित तरीके अपनाने और कैप्टिव पावर प्लांट्स के जरिए नई क्षमता जोड़ने का सुझाव दिया गया है। छोटे उपभोक्ताओं के लिए स्टोरेज सुविधा डिस्कॉम के जरिए उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे लागत कम होगी। इसके अलावा उपभोक्ता डिस्ट्रिब्यूटेड रिन्यूएबल एनर्जी (DRE) से बची हुई बिजली का व्यापार कर सकेंगे।
परमाणु ऊर्जा में लक्ष्य
शांति अधिनियम 2025 के तहत नीति में एडवांस न्यूक्लियर तकनीक, मॉड्यूलर रिएक्टर और छोटे परमाणु रिएक्टर का इस्तेमाल बढ़ाने और उद्योगों द्वारा परमाणु ऊर्जा का उपयोग कर 2047 तक 100 गीगावाट न्यूक्लियर ऊर्जा क्षमता हासिल करने की सिफारिश की गई है।
इतिहास और प्रगति
पहली राष्ट्रीय विद्युत नीति 2005 में बिजली की कमी, सीमित पहुंच और कमजोर ढांचे जैसी समस्याओं को दूर करने का लक्ष्य रखा गया था। तब से भारत के विद्युत क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। सरकार का कहना है कि ड्राफ्ट एनईपी 2026 एक ऐसा पूरा खाका है, जिससे देश के लोगों को सस्ती, भरोसेमंद और उच्च गुणवत्ता की बिजली मिल सकेगी।
