रतलाम सैलाना । बाजना अंचल के राजापुरा गांव में जननायक टंट्या भील की प्रतिमा स्थापना को लेकर शासन और जनप्रतिनिधि आमने-सामने आ गए हैं। सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार ने प्रशासनिक आदेशों को दरकिनार करते हुए देर रात ग्रामीणों के साथ मिलकर प्रतिमा स्थापित कर दी। यह कदम तब उठाया गया जब एसडीएम ने ग्रामसभा के प्रस्ताव के बावजूद प्रतिमा लगाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। विवाद की जड़: ग्रामसभा बनाम प्रशासनिक अनुमति राजापुरा गांव के ग्रामीणों ने प्रतिमा स्थापना के लिए ग्रामसभा में विधिवत प्रस्ताव पारित किया था और इसके लिए आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र NOC भी तैयार किया था। जब ग्रामीण इस प्रस्ताव की सूचना देने सैलाना एसडीएम कार्यालय पहुंचे तो वहां उन्हें निराशा हाथ लगी।
SDM का पक्ष: सैलाना एसडीएम ने ग्रामसभा की कार्यवाही को तकनीकी आधार पर अवैध बताते हुए कहा कि केवल ग्रामसभा का प्रस्ताव पर्याप्त नहीं है। उन्होंने प्रतिमा स्थापना के लिए पुरातत्व विभाग और अन्य संबंधित विभागों से औपचारिक अनुमति लेने की शर्त रखी। विधायक का रुख सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार इस बात से नाराज हो गए कि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में ग्रामसभा के अधिकारों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन पर जानबूझकर अड़ंगा लगाने का आरोप लगाया देर रात हुई प्रतिमा की स्थापना एसडीएम कार्यालय से अनुमति न मिलने के बाद विधायक डोडियार ने कड़ा रुख अपनाया। वे रात के अंधेरे में ही राजापुरा गांव पहुंचे और ग्रामीणों की मौजूदगी में जननायक टंट्या भील की प्रतिमा को निर्धारित स्थान पर स्थापित करवा दिया।
विधायक का तर्क है कि पेसा कानून PESA Act के तहत ग्रामसभा को अपने क्षेत्र में निर्णय लेने का अधिकार है और प्रशासन को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। शासनिक हलचल तेज बिना अनुमति प्रतिमा स्थापित होने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है। पुलिस और राजस्व विभाग के अधिकारी मामले की निगरानी कर रहे हैं। संभावना जताई जा रही है कि प्रशासन इस अवैध स्थापना को लेकर विधायक और संबंधित ग्रामीणों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई कर सकता है जिससे क्षेत्र में तनाव बढ़ने की आशंका है।
प्रमुख बिंदु
स्थान राजापुरा गांव बाजना अंचल सैलाना। विवाद का कारण: प्रतिमा स्थापना के लिए प्रशासनिक अनुमति का न मिलना। विधायक का कदम: ग्रामसभा के अधिकारों का हवाला देते हुए स्वयं प्रतिमा स्थापित की। प्रशासनिक तर्क: पुरातत्व विभाग और अन्य तकनीकी अनुमतियों का अभाव।