नई दिल्ली । अरावली की पहाड़ियों में अवैध खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बेहद तल्ख टिप्पणी की है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अरावली में जिस तरह से अवैध खनन जारी है, वह ऐसे हालात पैदा कर देगा जिन्हें भविष्य में कभी सुधारा नहीं जा सकेगा। कोर्ट ने चेतावनी दी कि पर्यावरण के साथ खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों और दोषियों को सख्त सजा भुगतनी होगी।
एक्सपर्ट कमेटी करेगी वैज्ञानिक समीक्षा
अरावली के संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए कोर्ट ने एक स्वतंत्र विशेषज्ञ निकाय गठित करने का निर्णय लिया है। यह कमेटी अरावली की परिभाषा से जुड़े निम्नलिखित पहलुओं की समीक्षा करेगी वैज्ञानिक और पर्यावरणीय: पारिस्थितिकी तंत्र पर खनन का प्रभाव। भूवैज्ञानिक: पहाड़ियों की संरचना और उनकी ऊंचाई से जुड़े विवाद विधिक: चार राज्यों राजस्थान, गुजरात, दिल्ली और हरियाणा में अरावली के संरक्षण के लिए बने कानूनों की स्थिति।
पहाड़ियों की परिभाषा पर बदला था रुख
उल्लेखनीय है कि 20 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने 100 मीटर से छोटी पहाड़ियों पर खनन की अनुमति दी थी, लेकिन इस आदेश के बाद देश भर में पर्यावरणविदों ने चिंता जताई थी। 100 मीटर की ऊंचाई की परिभाषा पर छिड़े विवाद को देखते हुए कोर्ट ने 29 नवंबर को अपने ही आदेश पर रोक लगा दी थी। अब बेंच का मानना है कि इस पूरे मुद्दे की वैज्ञानिक आधार पर पुन: समीक्षा की आवश्यकता है।
राज्यों को नोटिस और राजस्थान से गारंटी
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार से कड़ी गारंटी मांगी है कि अरावली क्षेत्र में किसी भी तरह का नया खनन नहीं होने दिया जाएगा। साथ ही, केंद्र सरकार और अरावली से सटे चार राज्यों राजस्थान, गुजरात दिल्ली और हरियाणा को नोटिस जारी कर इस संवेदनशील मुद्दे पर जवाब तलब किया है।
यह कोई प्रतिद्वंद्वी मुकदमा नहीं
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अरावली के संरक्षण का उद्देश्य किसी पक्ष को हराना नहीं बल्कि प्रकृति को बचाना है। पीठ ने कहा, अरावली पर्वतमाला का संरक्षण बेहद महत्वपूर्ण है। यह मामला पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा है, इसलिए हम इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेंगे। प्रमुख बिंदु पीठ: CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच। मुख्य कदम: स्वतंत्र विशेषज्ञ निकाय का गठन। प्रतिवादी केंद्र सहित राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और गुजरात सरकार। अगला लक्ष्य अरावली की परिभाषा और संरक्षण मानकों की वैज्ञानिक समीक्षा।
