सूत्रों के अनुसार, इस साजिश का मुख्य फोकस जम्मू-कश्मीर था, जहां आतंकी संगठन बड़े और समन्वित हमलों को अंजाम देने की फिराक में थे। इसके साथ ही दिल्ली और उत्तर भारत के अन्य संवेदनशील क्षेत्रों को भी संभावित निशानों में शामिल किया गया था। इंटेलिजेंस रिपोर्ट में अयोध्या के राम मंदिर का भी उल्लेख है, जहां पहले से ही खतरे की आशंका को देखते हुए 6 दिसंबर को सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया था। इन सूचनाओं के सामने आते ही केंद्र और राज्य स्तर पर सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ा दिया गया है।
खुफिया एजेंसियों ने यह भी चेतावनी दी है कि जैश-ए-मोहम्मद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए युवाओं को उकसाने और कट्टरपंथ की ओर धकेलने की कोशिश कर रहा है। इसके अलावा कश्मीरी रेजिस्टेंस ग्रुप से जुड़े ‘फाल्कन स्क्वाड’ पर भी पैनी नजर रखी जा रही है, जो लगातार धमकियां दे रहा है और मुस्लिम युवाओं को भड़काने का प्रयास कर रहा है। रिपोर्ट में यह आशंका भी जताई गई है कि पंजाब आधारित कुछ गैंगस्टरों के आतंकी नेटवर्क से जुड़ाव हो सकता है, जिससे उत्तर भारत के कई राज्यों में सुरक्षा चिंताएं और बढ़ गई हैं।
गणतंत्र दिवस समारोह को देखते हुए दिल्ली में बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। परेड मार्ग, प्रमुख सरकारी इमारतों, भीड़भाड़ वाले इलाकों और सीमावर्ती क्षेत्रों में अतिरिक्त बलों की तैनाती की गई है। कश्मीर घाटी में तलाशी अभियानों और निगरानी को तेज कर दिया गया है, वहीं ड्रोन, सीसीटीवी और तकनीकी निगरानी के जरिए हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों का स्पष्ट संदेश है कि किसी भी तरह की आतंकी कोशिश को शुरुआती स्तर पर ही विफल किया जाएगा। सुरक्षा एजेंसियों ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति मिलकर ‘कोड नेम 26-26’ साजिश की हर कड़ी को खंगाल रही हैं और इसे पूरी तरह नाकाम करने के लिए ठोस कार्रवाई में जुटी हैं।
