रोहिणी ने कहा लानत है बिहार में सुशासन एवं कानून के राज के दावों पर। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि वर्तमान स्थिति में मां बहन और बेटियों की सुरक्षा उनका मर्यादापूर्ण अस्तित्व और कैरियर बनाने की कोशिशें संतोषजनक नहीं हैं बल्कि चिंताजनक और अफ़सोसजनक हैं। उनका आरोप है कि पटना जैसे शहर में जिसे सुरक्षित माना जाता है बेटियों और बहनों के साथ बलात्कार हत्या और जबरन देह-व्यापार जैसी घटनाएं हो रही हैं।रोहिणी ने आगे लिखा कि प्रदेश में यौन अपराधों की संख्या बेतहाशा बढ़ी है और अपराधियों के बीच कानून और पुलिस का कोई खौफ नहीं बचा। उन्होंने शम्भू गर्ल्स हॉस्टल मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि अपराधियों और प्रशासन के बीच सांठ-गांठ की घटनाएं सामने आई हैं।
उन्होंने बिहार के शासन ढांचे की लचरता और अधिकारियों की उदासीनता को भी कठघरे में खड़ा किया। रोहिणी का कहना है कि मुख्यमंत्री और गृह मंत्री यौन अपराधों को गंभीरता से नहीं ले रहे और इसी कारण बहन-बेटियों के पलायन की आशंका बढ़ रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि पहले से ही युवाओं का पलायन झेल रही बिहार अब बहन-बेटियों को भी खो सकता है।मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार पुलिस ने SIT गठित की है जिसका नेतृत्व आईजी जितेंद्र राणा कर रहे हैं। पुलिस मामले की तह तक जाने का प्रयास कर रही है लेकिन करीब दस दिन बीतने के बावजूद स्थिति अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है। छात्रा की मौत ने राज्य में सुरक्षा व्यवस्था और कानून के पालन पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
राजनीतिक हलचल के बीच सामाजिक और अभिभावक वर्ग भी चिंतित है। NEET जैसी परीक्षा की तैयारी कर रही बेटियों की सुरक्षा और हॉस्टल व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी राज्य प्रशासन की संवेदनशीलता पर प्रश्नचिह्न लगा रही है।इस घटना ने बिहार में सुशासन कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गहन बहस को जन्म दिया है और सभी वर्गों का ध्यान इस ओर गया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
