पूर्ण भुजंगासन कैसे करें
योग विशेषज्ञों के अनुसार इस आसन का अभ्यास बेहद सावधानी और सही तकनीक के साथ करना चाहिए। इसे करने के लिए सबसे पहले पेट के बल ज़मीन पर लेट जाएं। दोनों हथेलियों को कंधों के पास रखें और पैर सीधे रखें। अब गहरी सांस लेते हुए धीरे-धीरे छाती गर्दन और सिर को ऊपर उठाएं। कोहनियों को थोड़ा मोड़ें और कंधों को पीछे की ओर खींचें। इसके बाद घुटनों को मोड़ते हुए पैरों के पंजे ऊपर उठाएं और सिर-गर्दन को पीछे की ओर तानें। कोशिश करें कि पैरों के पंजे सिर को छू सकें।इस मुद्रा में बिना किसी दबाव के जितनी देर आराम से रह सकें उतनी देर रुकें। फिर सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे वापस नीचे आएं और शवासन की स्थिति में लेटकर शरीर को पूरी तरह शिथिल करें। गहरी सांस लें और हृदय गति को सामान्य होने दें।
पूर्ण भुजंगासन के प्रमुख फायदे
नियमित रूप से पूर्ण भुजंगासन करने से रीढ़ की हड्डी मजबूत और लचीली बनती है। यह आसन पाचन तंत्र को बेहतर करता है और थायरॉइड ग्रंथि को सक्रिय करने में मदद करता है। इसके अलावा यह तनाव और चिंता को कम करने में सहायक माना जाता है। खासतौर पर जो लोग लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करते हैं या जिन्हें कमर और पीठ दर्द की शिकायत रहती है उनके लिए यह आसन बेहद लाभकारी हो सकता है।
कब न करें यह आसन
हालांकि पूर्ण भुजंगासन बेहद लाभकारी है लेकिन कुछ स्थितियों में इससे बचना चाहिए। गर्भवती महिलाएं गंभीर पीठ दर्द से पीड़ित लोग उच्च रक्तचाप हर्निया या हाल ही में सर्जरी कराने वाले व्यक्तियों को यह आसन नहीं करना चाहिए।
शुरुआत में रखें ये सावधानियां
शुरुआती दिनों में इस आसन को धीरे-धीरे सीखना चाहिए और किसी योग विशेषज्ञ की देखरेख में अभ्यास करना सबसे बेहतर रहता है। विशेषज्ञों का कहना है कि योग में धैर्य और नियमितता सबसे अहम होती है। पूर्ण भुजंगासन जैसे उन्नत आसन शरीर की क्षमता बढ़ाते हैं लेकिन गलत तरीके से करने पर चोट का खतरा भी हो सकता है।नियमित अभ्यास सही तकनीक और सावधानी के साथ किया गया पूर्ण भुजंगासन न सिर्फ रीढ़ को मजबूत बनाता है बल्कि बदन दर्द से राहत दिलाकर जीवन को अधिक सक्रिय और ऊर्जावान बना सकता है।
