खांसी के प्रकार
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसारखांसी मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है – सूखी खांसी और बलगम वाली खांसी। सूखी खांसी में गले में खुजलीजलन और लगातार खांसी होती है। वहींबलगम वाली खांसी में छाती भारी महसूस होती हैबलगम निकलता है और सीने में दबाव या तकलीफ होती है। दोनों ही प्रकार की खांसी में गले में जलन और सीने की बेचैनी आम संकेत हैं। यदि खांसी कई दिनों तक कम न हो तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना आवश्यक है।
आयुर्वेदिक नुस्खे और घरेलू उपाय
आयुर्वेदाचार्य बताते हैं कि सूखी खांसी में मुलेठी या लौंग का एक छोटा टुकड़ा चूसने से गले को तुरंत आराम मिलता है। इसके अलावावासा के पत्तों का काढ़ा पीना या इसका पाउडर लेना कफ को कम करने में मदद करता है। सोने से पहले हल्दी मिलाकर गर्म दूध पीना गले की जलन और खांसी में राहत देता है।बलगम वाली खांसी या सामान्य खांसी के लिए गुनगुने अदरक का काढ़ाअदरक-तुलसी का काढ़ा शहद के साथ लेने से कफ पतला होकर बाहर निकलता है। इसके अलावागर्म पानी में नमक डालकर गरारा करना और भाप लेना भी गले और छाती की जलन को कम करता है। लौंगअदरक और इलायची को मिलाकर पाउडर या काढ़ा के रूप में इस्तेमाल करना भी खांसी में आराम देता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ये आयुर्वेदिक नुस्खे प्राकृतिक और सुरक्षित हैं। इन उपायों को संतुलित आहारपर्याप्त पानी और पर्याप्त आराम के साथ अपनाने से खांसी में तेजी से सुधार होता है। नियमित रूप से इन नुस्खों का पालन करने से न केवल खांसी नियंत्रित रहती हैबल्कि सांस की सेहत भी मजबूत बनती है।हालांकियदि खांसी के साथ सांस फूलनाबुखारलगातार कमजोरी या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देंतो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। शुरुआती चरण में अपनाए गए आयुर्वेदिक नुस्खे समय पर राहत देने के साथ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाते हैं।
