योगेश और खुशबू सात दिन के केरल प्रवास के बाद सोमवार को कोच्चि से इंदौर लौट रहे थे। उनकी टिकट एयर इंडिया की कनेक्टिंग फ्लाइट-कोच्चि से दिल्ली और फिर दिल्ली से इंदौर-के लिए थी। यात्रा मंगलवार सुबह इंदौर पहुंचकर पूरी हुई। लेकिन कोच्चि से दिल्ली की फ्लाइट का समय कई बार बदला गया। पहले दोपहर 1:20 बजे, फिर 4:30 और 5:30 बजे का अपडेट दिया गया। अंततः विमान शाम 5:42 बजे रवाना हुआ और रात 8:21 बजे दिल्ली पहुंचा। इस देरी के कारण दंपती की दिल्ली–इंदौर कनेक्टिंग फ्लाइट छूट गई।
योगेश ने बताया कि दिल्ली पहुंचने पर उन्हें उसी रात इंदौर भेजा जा सकता था, लेकिन एयर इंडिया ने वैकल्पिक तौर पर उन्हें पुणे भेज दिया। रात करीब 2:30 बजे पुणे पहुंचने के बाद न तो एयरलाइन ने ठहरने की व्यवस्था की और न ही भोजन उपलब्ध कराया। मजबूरी में दोनों ने एयरपोर्ट की कुर्सियों पर रात बिताई। अगले दिन सुबह एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट से दंपती सुबह 9:10 बजे इंदौर पहुंचे।दंपती ने आरोप लगाया कि एयर इंडिया ने DGCA के दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया। नियमों के मुताबिक घरेलू उड़ान में दो घंटे से अधिक देरी होने पर यात्रियों को भोजन और रिफ्रेशमेंट देना अनिवार्य है। अगर देरी रातभर की हो तो होटल या लाउंज की व्यवस्था भी जरूरी है। इसके अलावा, ऑपरेशनल कारणों से हुई देरी पर यात्रियों को दूरी और समय के आधार पर 5,000 से 10,000 रुपये तक मुआवजा मिलने का प्रावधान है।
पीड़ित दंपती ने बताया कि उन्होंने एयरलाइन अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इस मामले ने एक बार फिर यात्रियों की सुविधा और एयरलाइनों की जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती हवाई यात्राओं के बीच एयरलाइनों को वैकल्पिक व्यवस्था और ग्राहक सहायता पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए ताकि यात्रियों को अनावश्यक मानसिक और शारीरिक कष्ट न झेलना पड़े।
