सूर्योदय की पहली किरण के साथ ही हिंदू समुदाय के श्रद्धालुओं ने मां वाग्देवी की प्रतिमा के समक्ष शीश नवाया। गुरुवार रात से ही भोजशाला में उत्सव का माहौल बन गया था, जब पूरी श्रद्धा के साथ मां वाग्देवी के चित्र को परिसर के भीतर स्थापित किया गया। आज सुबह से ही यहां महाआरती, धर्मसभा और भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया जा रहा है, जो सूर्यास्त तक अनवरत जारी रहेगा। श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर है और पूरा क्षेत्र ‘जय सरस्वती माता’ के उद्घोष से गुंजायमान है।
हालांकि, आज शुक्रवार होने के कारण स्थिति अधिक संवेदनशील है। न्यायिक निर्देशों के तहत, हिंदू समुदाय की अखंड पूजा के बीच ही दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक मुस्लिम पक्ष को जुमे की नमाज अदा करने की अनुमति दी गई है। इसके लिए प्रशासन ने परिसर के भीतर एक निश्चित स्थान और सीमित संख्या तय की है। नमाजियों और पूजा करने वालों के लिए अलग-अलग प्रवेश और निकास द्वार बनाए गए हैं, ताकि दोनों पक्षों के बीच किसी भी प्रकार का टकराव न हो और दोनों अपनी-अपनी धार्मिक परंपराओं का निर्वाह बिना किसी व्यवधान के कर सकें।
इस दोहरे आयोजन को देखते हुए धार शहर को पूरी तरह से एक अभेद्य छावनी में तब्दील कर दिया गया है। सुरक्षा की कमान किसी किलेबंदी से कम नहीं है, जहां 8000 से अधिक पुलिसकर्मी चप्पे-चप्पे पर तैनात हैं। सुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 13 एसपी रेंज के अधिकारियों के साथ 25 अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, 67 एसडीओपी और 107 नगर निरीक्षकों की फौज तैनात है। इसके अतिरिक्त, आरएएफ की 8 प्लाटून और सीआरपीएफ के जवानों ने मोर्चा संभाल रखा है। महिला पुलिसकर्मियों की भी भारी तैनाती की गई है ताकि भीड़ नियंत्रण में कोई चूक न हो।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि वे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का अक्षरशः पालन करा रहे हैं। ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी के जरिए हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है। स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं से शांति बनाए रखने की अपील की गई है। धार की यह धरा आज केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था और आपसी समन्वय की एक बड़ी परीक्षा का केंद्र बनी हुई है। शाम तक चलने वाले इस अखंड पूजन और नमाज के शांतिपूर्ण समापन को लेकर पूरा प्रशासन मुस्तैद है, ताकि भोजशाला की ऐतिहासिक गरिमा और सामाजिक समरसता अक्षुण्ण बनी रहे।
