प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नेताजी बोस का जीवन उन्हें व्यक्तिगत रूप से भी हमेशा प्रेरणा देता रहा है। उन्होंने वर्ष 2009 को स्मरण करते हुए बताया कि 23 जनवरी को गुजरात के आईटी क्षेत्र को रूपांतरित करने वाली अग्रणी ई-ग्राम विश्वग्राम योजना की शुरुआत की गई थी। यह योजना हरिपुरा से लॉन्च की गई थी, जिसका नेताजी बोस के जीवन में विशेष महत्व रहा है। प्रधानमंत्री ने हरिपुरा के लोगों द्वारा किए गए आत्मीय स्वागत और उसी ऐतिहासिक मार्ग पर आयोजित शोभायात्रा को भी याद किया, जिस पर कभी नेताजी सुभाष चंद्र बोस चले थे।
प्रधानमंत्री ने वर्ष 2012 में अहमदाबाद में आयोजित आज़ाद हिंद फौज दिवस समारोह को भी याद किया। उन्होंने कहा कि इस भव्य आयोजन में नेताजी बोस से प्रेरित अनेक लोग उपस्थित थे, जिनमें पूर्व लोकसभा अध्यक्ष श्री पी. ए. संगमा भी शामिल थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह आयोजन नेताजी की विचारधारा और उनके संघर्ष की जीवंत अभिव्यक्ति था।
बीते दशकों पर चिंतन करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस के गौरवपूर्ण योगदान को लंबे समय तक उचित सम्मान नहीं मिला और उन्हें भुलाने के प्रयास किए गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान दृष्टिकोण भिन्न है और उनकी सरकार ने हर संभव अवसर पर नेताजी के जीवन, संघर्ष और आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास किया है। इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम नेताजी बोस से जुड़ी फाइलों और दस्तावेजों को सार्वजनिक करना रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2018 ऐतिहासिक रहा, जब लाल किले पर आज़ाद हिंद सरकार की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ मनाई गई और उन्हें तिरंगा फहराने का अवसर प्राप्त हुआ। उन्होंने आईएनए के वरिष्ठ नेता ललती राम जी के साथ हुई बातचीत को भी याद किया। इसी वर्ष अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के श्रीविजयपुरम में नेताजी द्वारा तिरंगा फहराने की 75वीं वर्षगांठ पर ध्वजारोहण किया गया और रॉस द्वीप सहित तीन द्वीपों के नाम बदलकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप रखे गए।
प्रधानमंत्री ने बताया कि लाल किले स्थित क्रांति मंदिर संग्रहालय में नेताजी बोस और इंडियन नेशनल आर्मी से जुड़ी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक सामग्री संजोई गई है, जिसमें नेताजी द्वारा पहनी गई टोपी भी शामिल है। उन्होंने कहा कि नेताजी के सम्मान में उनकी जयंती को पराक्रम दिवस घोषित किया गया है और 2021 में उन्होंने कोलकाता स्थित नेताजी भवन का दौरा भी किया, जहाँ से नेताजी ने अपनी ऐतिहासिक यात्रा प्रारंभ की थी। औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति के संकल्प का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने इंडिया गेट के समीप राष्ट्रीय राजधानी के केंद्र में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की भव्य प्रतिमा स्थापित करने के निर्णय को उनकी विरासत के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि बताया। उन्होंने कहा कि यह प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।
