नई दिल्ली । हस्तरेखा शास्त्रके अनुसार, हमारी हथेलियां केवल चमड़ी पर खिंची हुई रेखाएं नहीं हैं बल्कि ये हमारे कर्मों और आने वाले भविष्य का दर्पण होती हैं। सामुद्रिक शास्त्र में कुछ ऐसे विशिष्ट निशानों और पर्वतों का उल्लेख किया गया है, जो किसी व्यक्ति को रंक से राजा बनाने की क्षमता रखते हैं। यदि आप भी जानना चाहते हैं कि आपकी आर्थिक स्थिति और मान-सम्मान का ग्राफ कैसा रहेगा तो अपनी हथेली में इन 5 प्रमुख निशानों को गौर से देखें।
सूर्य पर्वत पर ‘विजय’ की रेखा
हथेली में अनामिका उंगली के ठीक नीचे वाले उभार को सूर्य पर्वत कहा जाता है। यदि इस स्थान पर कोई स्पष्ट और बिना कटी-फटी रेखा दिखाई दे तो इसे सूर्य रेखा कहते हैं। यह रेखा व्यक्ति की सफलता का पैमाना है। प्रभाव जिस जातक के हाथ में यह रेखा गहरी होती है, उसे समाज में उच्च पद प्रतिष्ठा और सरकारी लाभ प्राप्त होता है। ऐसे लोगों का वैवाहिक जीवन भी काफी सामंजस्यपूर्ण और सुखी रहता है।
मस्तिष्क रेखा पर त्रिकोण
मस्तिष्क रेखा का अंत यदि दो भागों में विभाजित होकर एक त्रिकोण जैसी आकृति बना दे तो इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। आर्थिक पक्ष हस्तरेखा विशेषज्ञों के अनुसार, यह निशान व्यक्ति की कुशाग्र बुद्धि और धन संचय करने की अद्भुत क्षमता को दर्शाता है। ऐसे लोगों को जीवन में कभी आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ता।
हथेली में अर्धचंद्र का बनना
जब आप अपनी दोनों हथेलियों को आपस में जोड़ते हैं और हृदय रेखाएं मिलकर एक सुंदर आधा चाँद बनाती हैं तो यह आपके व्यक्तित्व और भाग्य के बारे में बहुत कुछ कहता है। संकेत यह निशान विलासितापूर्ण जीवन का प्रतीक है। ऐसे लोग स्वभाव से बहुत आकर्षक होते हैं और जीवन में हर तरह की भौतिक सुख-सुविधाएं हासिल करते हैं।
हृदय रेखा पर ‘त्रिशूल
यदि हृदय रेखा के अंत में गुरु पर्वत तर्जनी उंगली के नीचे के पास त्रिशूल का निशान बनता है, तो यह जातक पर दैवीय कृपा का संकेत है। सफलता ऐसे लोग समाज में पूजनीय होते हैं और परोपकारी स्वभाव के कारण बहुत ख्याति प्राप्त करते हैं। इनके पास धन के साथ-साथ मानसिक शांति भी प्रचुर मात्रा में होती है।
शुक्र पर्वत का उभार
अंगूठे के नीचे वाले हिस्से को शुक्र पर्वत कहा जाता है। यदि यह हिस्सा मांसल साफ और गुलाबी आभा लिए हुए है तो जातक भाग्यशाली होता है। ऐश्वर्य शुक्र पर्वत का विकसित होना प्रेम, सौंदर्य और अपार संपत्ति का कारक है। ऐसे व्यक्ति का जीवन सुख-साधनों से भरा रहता है।
