शनिदेव की पूजा का महत्व अत्यधिक है। प्रातः स्नान के बाद काले या नीले वस्त्र पहनकर शनि मंदिर जाना शुभ माना जाता है। जो लोग मंदिर नहीं जा सकते वे घर पर भी श्रद्धा भाव से पूजा कर सकते हैं। पूजा में सरसों के तेल का दीपक जलाना विशेष फलदायी माना गया है। दीपक में दो लौंग डालने से नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम होता है।
पूजा के दौरान मंत्र का जप करना लाभकारी है। मंत्र ॐ शं शनैश्चराय नमः का उच्चारण शनि दोष शांत करने में सहायक होता है। शनि चालीसा या शनि स्तोत्र का पाठ करने से मानसिक स्थिरता और आत्मबल बढ़ता है।पीपल के पेड़ की पूजा का शनिवार को विशेष महत्व है। मान्यता है कि पीपल में शनिदेव का वास होता है। सुबह या संध्या के समय पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। जल में काले तिल मिलाकर अर्पित करें और पीपल की सात परिक्रमा करें। यह उपाय साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव को कम करने में सहायक माना जाता है।
हनुमान जी की उपासना भी शनिदेव के अशुभ प्रभाव कम करने में मदद करती है। शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करने और लाल फूल तथा लड्डू अर्पित करने से भय, रोग और मानसिक तनाव दूर होता है।दान का विशेष महत्व है। शनिवार को काले तिल, उड़द दाल, लोहा, काले वस्त्र या जूते चप्पल जरूरतमंदों को दान करें। अंधों, अपंगों और असहाय लोगों को भोजन कराने से भी शनि की कठोरता कम होती है।
अन्य उपायों में कौवे को भोजन कराना, घर में घी का दीपक जलाना और शिवलिंग का काले तिल और बेलपत्र से अभिषेक करना शामिल हैं। ये उपाय सकारात्मक ऊर्जा और सुख समृद्धि बढ़ाने में सहायक हैं।श्रद्धा और नियमपूर्वक किए गए ये उपाय जीवन में आर्थिक संकट, करियर की बाधाएं, मानसिक अशांति और पारिवारिक तनाव कम करते हैं। शनिदेव की कृपा से जीवन में स्थिरता अनुशासन और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता
