
उमरिया 26 जनवरी 2026(हिन्द संतरी ) सुरेन्द्र सिंह त्रिपाठी – जिले के विश्वप्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व में आज कार्यक्रम के अंतर्गत सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से चयनित स्वस्थ 05 नर एवं 22 मादा भारतीय गौरों को वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप विशेष रूप से डिजाइन किए गए परिवहन वाहनों के माध्यम से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व लाया गया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में भारतीय गौर की आबादी को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से संचालित भारतीय गौर पुनर्स्थापना एवं ट्रांसलोकेशन कार्यक्रम अंतर्गत सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से कुल 27 भारतीय गौरों का स्थानांतरण कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है। यह महत्त्वाकांक्षी संरक्षण कार्यक्रम दिनांक 22 जनवरी 2026 से प्रारंभ होकर निर्धारित कार्ययोजना के अनुरूप आज दिनांक 26 जनवरी 2026 को संपन्न किया हुआ।
बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व के क्षेत्र संचालक डाक्टर अनुपम सहाय ने बताया कि यह एक वृहद कार्यक्रम था जिसमे सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के 150 से अधिक तथा बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के 60 से अधिक अधिकारी तथा कर्मचारी के साथ सम्पूर्ण प्रदेश के 09 से ज्यादा प्रतिष्ठित वन्य जीव चिकित्सक प्रत्यक्ष तौर पर सम्मिलित रहे । इस प्रकार 210 वन अमला, जिसका नेतृत्व श्रीमति राखी नंदा, क्षेत्र संचालक सतपुड़ा टाइगर रिजर्व द्वारा किया गया, के अथक प्रयास का परिणाम है जिन्होंने दिन रात कार्यरत रहकर कार्यक्रम को सफल बनाया। गौर कैप्चर के बाद का चुनौतीपूर्ण कार्य 593 किमी की यात्रा थी जिसमें चूँकि प्रत्येक वाहन में एक साथ 02 या 03 गौर परिवहन किए जा रहे थे ,अतः आपसी संघर्ष की संभावना कभी कभी बन जाती थी। ऐसे में परिवहन दल के प्रभारी वन अधिकारी तथा परिवहन दल के साथ चल रहे वन्य प्राणी चिकित्सक पूरे रास्ते रात्रि में मुस्तैद रहकर बिना विश्राम किए सतत् निगरानी कर प्रत्येक ट्रिप में गौर का परिवहन कर बांधवगढ़ तक लेकर आए। स्थानांतरण से पूर्व एवं पश्चात प्रत्येक गौर का पशु चिकित्सकीय परीक्षण, स्वास्थ्य आकलन तथा आवश्यक मॉनिटरिंग की गई। सभी गौरों को पूर्णतः सुरक्षित अवस्था में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की कल्लवाह परिक्षेत्र अंतर्गत निर्धारित गौर बाड़े में छोड़ा गया।
ट्रांसलोकेशन प्रक्रिया के दौरान वन्यजीव विशेषज्ञों, पशु चिकित्सकों, वन अधिकारियों, फील्ड स्टाफ एवं तकनीकी कर्मियों की संयुक्त टीम द्वारा संपूर्ण अभियान की सतत निगरानी की गई, जिससे गौर पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। सभी स्थानांतरित गौर वर्तमान में स्वस्थ अवस्था में हैं तथा नए पर्यावास में अनुकूलन की प्रक्रिया में हैं। इसके पहले 1998 में बांधवगढ़ से विलुप्ति पश्चात पुनर्स्थापना के क्रम में वर्ष 2010-11 में कान्हा से 50 तथा फरवरी 2025 में 22 गौर सतपुड़ा से यहाँ आ चुके हैं ।
यह ट्रांसलोकेशन कार्यक्रम भारत सरकार, मध्यप्रदेश वन विभाग, वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) एवं अन्य सहयोगी संस्थाओं के समन्वय से परियोजना “Population Management Strategies for Gaur: Supplementation of Gaur in Bandhavgarh Tiger Reserve, Madhya Pradesh” के अंतर्गत क्रियान्वित किया गया।
उक्त कार्यक्रम से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में भारतीय गौरों की दीर्घकालिक जनसंख्या स्थिरता सुनिश्चित करने, शाकाहारी वन्यजीव आधार (prey base) को सुदृढ़ करने तथा संपूर्ण पारिस्थितिक तंत्र के संतुलन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान प्राप्त होगा। यह पहल राज्य में वैज्ञानिक वन्यजीव प्रबंधन एवं जैव विविधता संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
