साजिश या लापरवाही बताया जा रहा है कि इन गोदामों में एक डेकोरेटिंग कंपनी और एक प्रसिद्ध मोमो चेन का काम होता था। यहां रहने वाले मजदूर पुरबा मेदिनीपुर और दक्षिण 24 परगना के निवासी थे। चश्मदीदों और भाजपा विधायक अशोक डिंडा के अनुसार, आधी रात को गोदाम का मुख्य गेट बाहर से बंद था, जिसके कारण आग लगने पर मजदूर बाहर नहीं निकल पाए और अंदर ही फंस गए। हालांकि, चार मजदूरों ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई, लेकिन लापता लोगों की संख्या 10 से अधिक होने की आशंका जताई जा रही है।
रेस्क्यू ऑपरेशन और प्रशासनिक चुनौतियां दमकल की 12 गाड़ियों ने करीब 7 घंटे तक आग से लोहा लिया, तब जाकर सुबह 10 बजे लपटों पर काबू पाया जा सका। बिजली मंत्री आरूप बिस्वास ने बताया कि गोदाम के भीतर धुआं इतना घना था कि कोलकाता नगर निगम की डिमोलिशन टीम को दीवारें तोड़ने के लिए बुलाना पड़ा। बारुईपुर के पुलिस अधीक्षक शुभेंदु कुमार ने स्पष्ट किया कि मलबा पूरी तरह साफ होने के बाद ही मौतों का सटीक आंकड़ा सामने आ पाएगा।
सियासी घमासान शुरू इस त्रासदी ने बंगाल की राजनीति में भी उबाल ला दिया है। नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने राज्य सरकार पर असंवेदनशीलता का आरोप लगाते हुए कहा कि जब मजदूर मर रहे थे, तब वरिष्ठ अधिकारी और मंत्री छुट्टी मना रहे थे। दूसरी ओर, अग्निशमन मंत्री सुजीत बोस ने कहा कि सुरक्षा मानकों की जांच की जा रही है और मालिकों की जवाबदेही तय की जाएगी। फिलहाल, पूरे इलाके में मातम छाया हुआ है और बचाव दल मलबे में दबे संभावित जिंदगियों की तलाश में जुटा है।
