‘विंग्स इंडिया 2026’ में भारत दिखाएगा मैन्युफैक्चरिंग क्षमता
हैदराबाद के बेगमपेट एयरपोर्ट पर आयोजित नागरिक विमानन सम्मेलन ‘विंग्स इंडिया 2026’ का उद्घाटन करते हुए मंत्री ने कहा कि आने वाले 10–20 वर्षों में यह इकोसिस्टम केवल घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत को वैश्विक निर्यात केंद्र के रूप में भी स्थापित करेगा।
उन्होंने कहा कि इस बार के सम्मेलन में भारत नागरिक विमानन क्षेत्र, खासकर एविएशन मैन्युफैक्चरिंग, में अपनी बढ़ती क्षमता का प्रदर्शन करेगा।
‘उड़ान’ योजना से बदली देश की एविएशन तस्वीर
राम मोहन नायडू ने कहा कि देश में एयरपोर्ट्स, यात्रियों और विमानों की संख्या में आई तेज़ वृद्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और केंद्र सरकार की ‘उड़ान’ योजना का नतीजा है।
“पिछले एक दशक में भारत का नागरिक विमानन क्षेत्र अभूतपूर्व गति से आगे बढ़ा है,” उन्होंने कहा।
एम्ब्रेयर–अदाणी एयरोस्पेस करार से मिलेगा बड़ा बूस्ट
मंत्री ने बताया कि मंगलवार को ब्राजील की कंपनी एम्ब्रेयर और अदाणी एयरोस्पेस के बीच देश में विमान निर्माण को लेकर करार हुआ है।
दोनों कंपनियां मिलकर भारत में मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम विकसित करेंगी
इस साझेदारी की समयसीमा अगले महीने तय होगी
ब्राजील के राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान पीएम मोदी से बातचीत के बाद इसकी रूपरेखा स्पष्ट होगी
उन्होंने कहा,
“यह नया भारत है, जो एविएशन सेक्टर में एक भरोसेमंद वैश्विक साझेदार बनकर उभर रहा है।”
अगले दो वर्षों में दिखेगी ठोस प्रगति
राम मोहन नायडू ने उम्मीद जताई कि अगले दो वर्षों में एविएशन मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ठोस और सकारात्मक प्रगति देखने को मिलेगी।
बोइंग 787-9 का निरीक्षण, एयर इंडिया को पहली डिलीवरी
विमानों की प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए मंत्री ने बोइंग 787-9 विमान का निरीक्षण किया।
उन्होंने बताया,
“यह विमान विशेष रूप से एयर इंडिया के लिए तैयार किया गया है और यह इसकी पहली डिलीवरी है।”
विमानों की उपलब्धता बड़ी चुनौती
मंत्री ने कहा कि विमानन उद्योग की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक विमानों की उपलब्धता है।
बोइंग और एयरबस को बड़ी संख्या में ऑर्डर दिए जा चुके हैं
डिलीवरी इस साल से शुरू हो चुकी है
अगले साल भारत के यात्रियों के लिए खास तौर पर डिजाइन किए गए विमान मिलने से सेक्टर को मजबूती मिलेगी
भारत से 2 अरब डॉलर तक के पुर्जे खरीद रहीं बोइंग–एयरबस
राम मोहन नायडू ने बताया कि बोइंग और एयरबस पहले से ही भारत से 2 अरब डॉलर तक के विमान पुर्जे खरीद रही हैं।
देश के अलग-अलग हिस्सों में कई एविएशन मैन्युफैक्चरिंग सेंटर विकसित किए जा रहे हैं, जिससे भारत की वैश्विक भूमिका और मजबूत होगी।
पिछले 10 वर्षों में भारत में विमानों और एयरपोर्ट्स की संख्या दोगुनी हो गई है।
अब भारत एविएशन मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देकर खुद को वैश्विक निर्यात हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
