भारतीय दवा उद्योग को मिलेगा बड़ा लाभ
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अनुसार, यह एफटीए भारतीय दवा कंपनियों को अपने कारोबार का विस्तार करने, नई नौकरियां पैदा करने और भारत को एक भरोसेमंद वैश्विक दवा आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा।
मंत्रालय ने कहा कि इससे भारत की पहचान ‘दुनिया की फार्मेसी’ के रूप में और सुदृढ़ होगी।
रोजगार और एमएसएमई को मिलेगा बढ़ावा
मंत्रालय के मुताबिक, इस समझौते से—
कुशल और औद्योगिक रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
छोटे और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) की भागीदारी मजबूत होगी
भारत का वैश्विक सप्लाई चेन से जुड़ाव और गहरा होगा
जेपी नड्डा बोले— नए अवसरों के दरवाजे खुले
केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि यह एफटीए दवा और मेडिकल उपकरण उद्योग के लिए नए अवसरों के द्वार खोलता है।
उन्होंने कहा,
“यूरोप के 572.3 अरब डॉलर के फार्मा और मेडिकल टेक्नोलॉजी बाजार तक पहुंच और भारतीय मेडिकल उपकरणों पर कम टैरिफ से इस सेक्टर की तेजी से वृद्धि होगी।”
नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत स्वास्थ्य और निर्माण क्षेत्र में एक विश्वसनीय वैश्विक साझेदार के रूप में लगातार अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है।
‘मेड इन इंडिया’ को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन
इस एफटीए से—
‘मेड इन इंडिया’ मेडिकल उपकरणों पर टैरिफ कम होगा
रसायन, उर्वरक, दवाएं, कॉस्मेटिक, साबुन और डिटर्जेंट जैसे क्षेत्रों में तेज विकास होगा
उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और एमएसएमई क्लस्टर विकसित होंगे
राज्यों और निर्यात केंद्रों को फायदा
यह समझौता गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों के औद्योगिक केंद्रों के लिए भी नए अवसर लाएगा।
समुद्री तटीय निर्यात केंद्रों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे रोजगार, प्रोसेसिंग और निर्यात आधारित उद्योगों को मजबूती मिलेगी।
रणनीतिक साझेदारी की दिशा में अहम कदम
मंत्रालय ने कहा कि भारत-ईयू एफटीए साझा मूल्यों को मजबूत करता है, नवाचार को बढ़ावा देता है और भारत व यूरोप दोनों के लिए समावेशी, मजबूत और भविष्य के लिए तैयार विकास की नींव रखता है।
भारत-ईयू एफटीए से भारतीय दवा उद्योग को यूरोप के 572.3 अरब डॉलर के विशाल बाजार तक सीधी पहुंच मिली है।
इस समझौते से रोजगार, एमएसएमई, निर्यात और ‘मेड इन इंडिया’ को बड़ी ताकत मिलने की उम्मीद है।
