सांदीपनि विद्यालय: आधुनिकता और परंपरा का संगम
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि सांदीपनि विद्यालयों की परिकल्पना गुरुकुल शिक्षा पद्धति से प्रेरणा लेकर की गई है। अत्याधुनिक सुविधाएं इन विद्यालयों में केवल भवन ही नहीं, बल्कि बेहतर अधोसंरचना, स्मार्ट क्लास और कुशल मानव प्रबंधन शिक्षक सुनिश्चित किए गए हैं। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा इसका उद्देश्य हर विद्यार्थी तक समावेशी और उच्च स्तरीय शिक्षा की पहुंच बनाना है, ताकि वे वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो सकें।
शिक्षा का अधिकार 8.50 लाख बच्चों के लिए पुख्ता
मुख्यमंत्री ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम’ RTE के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर देते हुए कहा कि प्रदेश की सरकार हर बच्चे को अनिवार्य शिक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध है। स्थायी प्रबंधन प्रदेश के 8.50 लाख से अधिक विद्यार्थियों की शिक्षा के लिए सरकार ने स्थायी और पुख्ता इंतजाम किए हैं। समावेशी दृष्टिकोण आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बच्चों को भी मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने के लिए निजी स्कूलों में आरक्षण और सरकारी स्कूलों के उन्नयन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री का संकल्प भविष्य संवारने में नहीं होगी कमी
डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि प्रदेश की शिक्षा प्रणाली अब केवल साक्षरता तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि यह बच्चों के समग्र विकास और कौशल संवर्धन पर आधारित होगी। उन्होंने कुशल मानव प्रबंधन को शिक्षा की रीढ़ बताते हुए शिक्षकों की ट्रेनिंग और शैक्षणिक वातावरण में सुधार के लिए निरंतर कार्य करने की बात कही। मुख्यमंत्री के अनुसार, ये 369 सांदीपनि विद्यालय भविष्य में प्रदेश के शैक्षणिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल देंगे और मध्य प्रदेश को एक एजुकेशन हब के रूप में स्थापित करेंगे।
