नई दिल्ली. बॉलीवुड स्टार(Bollywood star) रणवीर सिंह(Ranveer Singh) की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. गोवा में आयोजित इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया(International Film Festival of India) के मंच पर जोश दिखाना उन्हें अब भारी पड़ गया है. दरअसल, रणवीर पर आरोप है कि उन्होंने वहां ऋषभ शेट्टी(Rishab Shetty)की फिल्म ‘कांतारा: चैप्टर 1’ के पवित्र दैव अनुष्ठान की नकल की और मजाक उड़ाया. इस मामले ने अब कानूनी तूल पकड़ लिया है और बेंगलुरु के हाई ग्राउंड्स पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो चुकी है. यह पूरी घटना 28 नवंबर 2025 की है, जिसने अब जाकर उनकी मुसीबतें बढ़ा दी हैं.
रणवीर सिंह पर चावुंडी दैव का अपमान करने का आरोप
यह शिकायत बेंगलुरु के वकील प्रशांत मेथल ने दर्ज कराई है. शिकायत में आरोप है कि रणवीर सिंह ने अपनी परफॉर्मेंस के जरिए तटीय कर्नाटक की बेहद पवित्र चावुंडी दैव परंपरा का अपमान किया है, जिससे हिंदू समाज की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है. इस मामले में रणवीर सिंह पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 196, 299 और 302 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है.
पवित्र अभिव्यक्तियों की नकल उतार उड़ाया मजाक
एफआईआर के मुताबिक, शिकायतकर्ता का आरोप है कि रणवीर सिंह ने स्टेज पर अपनी परफॉर्मेंस के दौरान पवित्र दैव परंपरा का मजाक उड़ाया. उन्होंने दैव अनुष्ठान जैसे संवेदनशील और आस्था से जुड़े विषय को बेहद भद्दे, मजाकिया और अपमानजनक तरीके से पेश किया. शिकायत में इस बात पर खास तौर पर आपत्ति जताई गई है कि रणवीर ने परफॉर्मेंस के दौरान पंजुरली और गुलिगा दैव से जुड़ी पवित्र मुद्राओं और भावों की नकल उतारी, जिसे इस परंपरा को मानने वालों ने अपनी आस्था का अपमान माना है.
वकील ने अपनी शिकायत में एक और गंभीर आरोप लगाया है. उनका कहना है कि रणवीर सिंह ने चावुंडी दैव को फीमेल घोस्ट (महिला भूत) कहकर संबोधित किया है. शिकायतकर्ता के मुताबिक, रणवीर की यह टिप्पणी न केवल गलत है, बल्कि यह इस पवित्र शक्ति के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व को पूरी तरह से धूमिल करती है.
अब यह पूरा मामला बेंगलुरु के प्रथम अतिरिक्त मुख्य महानगरीय मजिस्ट्रेट कोर्ट की दहलीज पर पहुंच चुका है, जहां अदालत इस केस की बारीकी से जांच कर रही है. कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 8 अप्रैल की तारीख तय की है. अदालती दस्तावेजों के अनुसार, वकील प्रशांत मेथल ने पिछले साल 27 दिसंबर को बेंगलुरु के अतिरिक्त न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने एक निजी शिकायत दर्ज कराई थी. इस पर संज्ञान लेते हुए अदालत ने 23 जनवरी को कड़ा रुख अपनाया और हाई ग्राउंड्स पुलिस स्टेशन को आदेश दिया कि वह भारतीय न्याय संहिता की धारा 175(3) के तहत इस मामले में औपचारिक एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू करे.
