प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा अपने संदेश में राष्ट्रपिता को नमन करते हुए कहा कि बापू का स्वदेशी विचार केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता तक सीमित नहीं था, बल्कि यह आत्मसम्मान, आत्मबल और सामाजिक चेतना से भी जुड़ा हुआ था। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी का दर्शन आज के भारत के विकास मॉडल में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है, जहां स्थानीय संसाधनों, स्वदेशी उत्पादों और भारतीय मूल्यों को प्राथमिकता दी जा रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी का संपूर्ण जीवन मानवता, करुणा और नैतिकता का प्रतीक है। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सत्य और अहिंसा जैसे मूल्यों के बल पर न केवल भारत को आज़ादी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, बल्कि पूरी दुनिया को शांति और सह-अस्तित्व का मार्ग भी दिखाया। बापू का यह संदेश आज के वैश्विक परिदृश्य में और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में यह भी कहा कि महात्मा गांधी का व्यक्तित्व देशवासियों को अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहने की सीख देता है। उन्होंने समाज के हर वर्ग को समानता, स्वच्छता, आत्मनिर्भरता और अनुशासन का महत्व समझाया। गांधीजी के विचारों में निहित सादगी और सेवा भाव आज भी राष्ट्र निर्माण की प्रेरक शक्ति बने हुए हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के जो संकल्प लिए गए हैं, उनकी जड़ें महात्मा गांधी के स्वदेशी और ग्राम स्वराज के विचारों में निहित हैं। स्थानीय से वैश्विक की सोच, कुटीर उद्योगों को बढ़ावा और आत्मनिर्भर समाज का निर्माण, बापू के सपनों को साकार करने की दिशा में उठाए गए कदम हैं।
देशभर में महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है। यह दिन शहीद दिवस के रूप में भी मनाया जाता है और राष्ट्रपिता के बलिदान को याद करने का अवसर प्रदान करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा व्यक्त किए गए विचार एक बार फिर यह स्मरण कराते हैं कि महात्मा गांधी केवल इतिहास के पन्नों तक सीमित व्यक्तित्व नहीं हैं, बल्कि वे आज भी भारत की आत्मा और दिशा के मार्गदर्शक हैं।
