महेश शर्मा ने पत्र में कहा है कि आज देश के कई प्रमुख मंदिरों में संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के दौरे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था इस हद तक बढ़ा दी जाती है कि नित्य पूजा-अर्चना करने वाले पुजारी, पुरोहित और सेवक भी अपने ही गर्भगृह, पूजा कक्ष और आवासीय क्षेत्रों से बाहर कर दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि उज्जैन के महाकाल मंदिर से लेकर वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर तक ऐसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जो सनातन परंपराओं के खिलाफ हैं।
पुजारी महासंघ ने हाल ही में वृंदावन में हुए एक घटनाक्रम का हवाला देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री और भाजपा अध्यक्ष के दौरे के दौरान पुजारियों, उनके परिवारों और महिलाओं के साथ पुलिस द्वारा कथित रूप से दुर्व्यवहार किया गया। महासंघ का आरोप है कि सुरक्षा के नाम पर मंदिरों की आंतरिक व्यवस्था को पूरी तरह दरकिनार कर दिया जाता है, जिससे न केवल पूजा पद्धति बाधित होती है, बल्कि पुजारियों के सम्मान को भी ठेस पहुंचती है।
इस मुद्दे पर महासंघ ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी तीखे सवाल किए हैं। पत्र में पूछा गया है कि यदि भविष्य में सत्ता परिवर्तन होता है और कोई अन्य मुख्यमंत्री गोरखनाथ पीठ में दर्शन करने पहुंचे तथा सुरक्षा का हवाला देकर योगी आदित्यनाथ या उनके संतों को मठ से बाहर कर दिया जाए, तो क्या वे इसे स्वीकार करेंगे। महासंघ ने तर्क दिया कि यदि यह स्थिति स्वयं के लिए अनुचित मानी जाती है, तो बांके बिहारी मंदिर में पुजारियों के साथ हुआ व्यवहार भी पूरी तरह गलत है।
अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने अपनी मांगों को स्पष्ट करते हुए कहा है कि जब तक कोई व्यक्ति राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर आसीन है, उसे पद के प्रोटोकॉल के साथ मंदिरों में प्रवेश नहीं करना चाहिए। यदि वे दर्शन करना चाहते हैं, तो एक सामान्य श्रद्धालु की तरह कतार में लगकर दर्शन करें। इससे मंदिरों की परंपरा, पूजा पद्धति और आध्यात्मिक वातावरण सुरक्षित रहेगा।
महासंघ का कहना है कि मंदिर किसी व्यक्ति विशेष के प्रभाव या सत्ता प्रदर्शन का स्थान नहीं, बल्कि आस्था, समानता और श्रद्धा का केंद्र हैं। वीआईपी कल्चर के कारण आम भक्तों में असंतोष बढ़ रहा है और पुजारियों का आत्मसम्मान भी प्रभावित हो रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस विषय में हस्तक्षेप कर समान प्रवेश कानून बनाने की अपील की है, ताकि देवालयों की मर्यादा और सनातन परंपरा अक्षुण्ण रह सके।
