सर्द हवाओं पर भारी पड़ी शिव-भक्ति रविवार तड़के से ही सेठानी घाट और आसपास के अन्य घाटों पर भक्तों की लंबी कतारें लगने लगी थीं। जैसे ही भोर की पहली किरण ने नर्मदा के जल को छुआ, पूरा वातावरण ‘नर्मदे हर’ और ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। ठिठुरन के बावजूद क्या बच्चे, क्या बूढ़ेहर कोई मां नर्मदा के शीतल जल में पुण्य लाभ अर्जित करने के लिए लालायित दिखा। श्रद्धालुओं ने स्नान के पश्चात सूर्य को अर्घ्य दिया और तट पर स्थित प्राचीन शिवलिंगों का विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर परिवार की सुख-समृद्धि की मंगल कामना की।
दान-पुण्य और मोक्ष की मान्यता शास्त्रों के अनुसार माघ पूर्णिमा का दिन आध्यात्मिक शुद्धि के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से व्यक्ति के समस्त ज्ञात-अज्ञात पापों का शमन होता है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। माताओं और बहनों ने घाट पर दीपदान किया और अन्न-वस्त्र का दान कर पुण्य लाभ कमाया। नर्मदापुरम की इस पावन धरा पर भक्तों का यह अटूट विश्वास दर्शाता है कि भारतीय संस्कृति में आस्था के आगे मौसम की कठोरता भी गौण हो जाती है।
प्रशासन द्वारा घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। गोताखोरों की टीम और पुलिस बल मुस्तैद रहा ताकि उमड़ती भीड़ के बीच कोई अप्रिय घटना न हो। दान-पुण्य भजन-कीर्तन और जप-तप का यह सिलसिला देर शाम होने वाली महाआरती तक जारी रहने की उम्मीद है।
