आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2026 में रोजाना औसतन 70 करोड़ से अधिक UPI ट्रांजैक्शन किए गए, जिनका औसत दैनिक मूल्य ₹91,403 करोड़ रहा। इसकी तुलना में दिसंबर 2025 में औसत दैनिक लेनदेन ₹90,217 करोड़ और ट्रांजैक्शन की संख्या करीब 69.8 करोड़ थी। यानी नए साल की शुरुआत के साथ ही डिजिटल भुगतान की रफ्तार में और तेजी देखने को मिली है।
NPCI के अनुसार दिसंबर 2025 में UPI लेनदेन का कुल मूल्य ₹27.97 लाख करोड़ था, जबकि जनवरी में इसमें करीब 21 प्रतिशत की मासिक वृद्धि दर्ज की गई। वहीं सालाना आधार पर ट्रांजैक्शन की संख्या में लगभग 28 से 29 प्रतिशत और कुल लेनदेन राशि में करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यह साफ संकेत देता है कि UPI अब केवल शहरी भुगतान का साधन नहीं रहा, बल्कि देशभर में रोजमर्रा की जरूरतों का अहम हिस्सा बन चुका है।
डिजिटल भुगतान के विस्तार में UPI QR कोड की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण रही है। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत में अब 70.9 करोड़ से ज्यादा एक्टिव UPI QR कोड मौजूद हैं, जो जुलाई 2024 की तुलना में करीब 21 प्रतिशत अधिक हैं। किराना दुकानों, मेडिकल स्टोर, ट्रांसपोर्ट हब और ग्रामीण बाजारों तक QR कोड की पहुंच ने स्कैन और पे को आम जनता के लिए सबसे आसान और भरोसेमंद भुगतान विकल्प बना दिया है।
UPI के साथ-साथ अन्य डिजिटल भुगतान माध्यमों में भी मजबूत प्रदर्शन देखने को मिला है। दिसंबर 2025 में IMPS के जरिए ₹6.62 लाख करोड़ का लेनदेन हुआ, जो सालाना आधार पर 10 प्रतिशत की बढ़त को दर्शाता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारत लगातार कैशलेस इकोनॉमी की दिशा में आगे बढ़ रहा है।विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में UPI लेनदेन में और तेजी देखने को मिल सकती है। सरकारी प्रोत्साहन, छोटे व्यापारियों की बढ़ती भागीदारी और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता बढ़ने से UPI भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को और मजबूत आधार प्रदान करेगा।
