ग्रामीणों के अनुसार बीमार मवेशियों में अचानक लार गिरना पेट फूलना सांस लेने में तकलीफ और कमजोरी जैसे लक्षण नजर आ रहे हैं। हालत इतनी तेजी से बिगड़ रही है कि कुछ मवेशियों की कुछ ही घंटों के भीतर मौत हो जा रही है। बीमारी के तेजी से फैलने की आशंका को देखते हुए ग्रामीणों ने एहतियातन अपने मवेशियों को बांधकर रखना शुरू कर दिया है ताकि संक्रमण अन्य पशुओं तक न पहुंचे।
मामले की जानकारी मिलते ही पशु चिकित्सा विभाग की चलित टीम गांव पहुंची और बीमार व स्वस्थ मवेशियों के ब्लड सैंपल लेकर जांच शुरू की। साथ ही एहतियात के तौर पर टीकाकरण का कार्य भी किया जा रहा है। बिजुरी के पशु चिकित्सक डॉ. गुप्ता ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह मामला फूड प्वाइजनिंग से जुड़ा हो सकता है हालांकि बीमारी की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट और लैब जांच आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
इस बीच ग्रामीणों ने पशु चिकित्सा विभाग पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर ही निगवानी क्षेत्र के पशु चिकित्सक डॉ. पांडे को सूचना देकर टीकाकरण की मांग की थी लेकिन ब्लॉक पशु चिकित्सा अधिकारी की ओर से समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। आरोप है कि इसी लापरवाही के कारण दो दिनों में 12 मवेशियों की जान चली गई।
ग्रामीणों ने बताया कि जब मामले की शिकायत कलेक्टर तक पहुंचाई गई तब जाकर पशु चिकित्सा विभाग हरकत में आया और टीम को गांव भेजा गया। फिलहाल गांव में दहशत का माहौल बना हुआ है और पशुपालक अपने मवेशियों को लेकर चिंतित हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद बीमारी के कारणों पर स्थिति साफ हो सकेगी। तब तक एहतियात बरतने और मवेशियों को खुले में चरने से रोकने की सलाह दी गई है।
